खोया सा ख्वाब

मैं खोया सा ख्वाब बन चुकी थी,तुने ही तो ढूंढा मूझे। उलझ गई थी, दुनिया के बेकार बंधनो में,तूने ही सुलझाया मूझे। दुनिया ने तो

हुनर पा लिया

हैरानी से पूछा करते हैं कुछ लोग मुझे,तुम हमेशा मुस्कान लिए ही फिरते रहते हो,उदास नहीं होते क्या कभी?तो मैंने मुस्कुराते हुए ही बोला। हूजूर

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