ख़ूबसूरत रिश्ता पति-पत्नी का (2)

ख़ूबसूरत रिश्ता पति-पत्नी का (1) मैं दर्द महसूस करु,पर उसका एहसास तुम्हे भी होता है,यह एक रिश्ता पति-पत्नी का है। मैं खुशी महसूस करु,पर झूम तुम भी उठते हो,यह एक रिश्ता पति-पत्नी का है। तुम कहे बिना ही सुन लेते हो,मेरे दिल की आवाज़,यह एक रिश्ता पति-पत्नी का है। मैं सपने देखु,पर साकार तुम भी करना... Continue Reading →

ચંચળ મન [चंचल मन]

ચંચળ મન!મનનું તો કામ જ છે ભટકવાનું. ક્યાં ભટકે એ પાછુ,જ્યાં ભાવનાત્મક આઘાત મળ્યા હોય એ તરફ. જે માણસોએ માનસિક પીડા આપી હોય,એ તરફ જ ભટકશે આ મન. જે પરિસ્થિતિઓથી તકલીફ પડી હોય,એ તરફ જ ભટકશે આ મન. જે કશુ મેળવી ન શક્યા હોય,એ તરફ જ ભટકશે આ મન. જ્યારે જ્યારે ભટકે, આ ચંચળ મન,ત્યારે... Continue Reading →

અંતરનો સંઘર્ષ (अंतर का संघर्ष)

અંતરના સંઘર્ષ ને હવે રોકી દઈએ,માનસિક સંઘર્ષ ને હવે રોકી દઈએ. કયા સુધી અધૂરપ અનુભવીશું? કયા સુધી કડવી યાદો ને સાચવીશું? મનમાં ભરાયેલો રોષ કાઢવો પડશે ને,કોના માટે કાઢવો પડશે? આપણા જ મન ની શાંતિ માટે,આપણા જ મન ની ખુશી માટે. સ્વીકાર માટે હવે પ્રયત્નો કરીએ,પૂર્ણતા માટે હવે પ્રયત્નો કરીએ. અપશબ્દો બોલનાર પર દયા દાખવી... Continue Reading →

सर्वोत्तम ध्यान

ध्यान लगाना ही है,तो परमात्मा पर लगाए। किस रिश्ते से क्या नहीं मिला,उस पर ध्यान न लगाए। परमात्मा ने हमे बहुत कुछ दिया,उस पर ध्यान लगाए। जो भी मिला है, उसके लिए कृतज्ञ रहे,खूबसूरत लम्हों पर ध्यान लगाए। जो नहीं मिला है, उस पर ध्यान लगाकर,क्यों लम्हों को बदसूरत करना? ध्यान लगाना ही है,तो परमात्मा... Continue Reading →

तूने जीने का सलीका सिखा दिया

प्रेम के जज़्बात को समझने कासलीका सिखा दिया तूने। प्रेम शब्दों का मोहताज नहीं,यह सिखा दिया तूने। शब्दों की उलझन में न रहकरनज़रअंदाज करना सिखा दिया तूने। रिश्तों को ख़ूबसूरती से जीने कासलीका सिखा दिया तूने। जब स्नेह अतूट होता है,तब शब्द मायने नहीं रखते है। प्रेम शब्दों का मोहताज नहीं,यह सिखा दिया तूने। ए... Continue Reading →

खुलकर जीने का मतलब

हम जीवन तो जीते है,पर क्या खुलकर जीते है? खुलकर जीना मतलबजीवन को निभा लेना।कोसे बिन जी लेना। कोसते कोसते और रोते रोते जीना नहीं है।पर हंसते-हंसते और जीगर से जीना है। खुलकर जीना मतलबमुश्किलों का सामना करना है,मुश्किलों से डरना नहीं है। खुलकर जीना मतलबहर हालात को स्वीकार करना है,हर हालात से अनुभव पाना... Continue Reading →

परिवार की रौनक़

आँख लग गई मेरी निंदिया में, नींद दे गई निंदिया रानी, और दे गई एक प्यारा सपना। सपने में देखा मैंने, एक खुशहाल ज़िंदगी है, हंसता खेलता एक परिवार है, प्यार सम्मान के तोहफें हैं, विश्वास की एक डोर है। फिर अचानक आवाज़ आई कुछ, और उड गई नींद, तूट गया सपना और दिखाई पडी हक़ीक़त!... Continue Reading →

#लघुकाव्य-6

हम मौज़ में,तो जग भी मज़े में दिखेगा। हम गम में,तो जग भी दुःख में दिखेगा। मन में बुरे विचार है,तो जग भी बुरा दिखेगा। जैसा हमारा भाव,वैसा हमारा जग। जैसी हमारी दृष्टि,वैसी हमारी सृष्टि। કવિતા નું સૌંદર્ય/ कविता का सौंदर्य लघुकाव्य-1 રાખ થઈ જાય સંબંધો / राख हो जाए रिश्तें लघुकाव्य-2 #લઘુકાવ્ય #लघुकाव्य – 3... Continue Reading →

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