ख़ूबसूरत रिश्ता

वो रिश्ता ही कुछ ऐसा है,जिसमें लेने से ज़्यादा,देने में मज़ा मिलता है।वो एक रिश्ता पति-पत्नी का है। जिसमें प्यार की कली खिली हो,जिसमें प्यार की महक उठी हो।बस प्यार ही प्यार बेशुमार हो,वो एक रिश्ता पति-पत्नी का है। जैसे बाती बिना दीया अधूरा,वैसे पत्नी बिना पति अधूरा!जैसे चांदनी बिना रात अधूरी,वैसे पति बिना पत्नी... Continue Reading →

एक परिंदा

एक परिंदा हूँ,जीवन गगन में, आज़ाद हूँ। पहले पिंजरे में केद थी,अपनी खुशियों के लिए,दूसरों पर आश्रित थी। पहले पिंजरे में केद थी,अपने जीवन के विकास के लिए,दूसरों पर आश्रित थी। अब खुद पर एतबार है,खुद के दम पर, मेहनत करके,जीवन को उमंग से जीना है। एक परिंदा हूँ,जीवन गगन में, आज़ाद हूँ।

उलझनें – जीवन का हिस्सा

चलते रहिए, चलते रहिएसारी उलझनों के साथ,चलते रहिए। करते रहिए, करते रहिएअपने कार्य (कर्तव्य) करते रहिए।चलते रहिए। उलझनें तो जीवन का हिस्सा है,उलझनों के साथ चलना,सीखते रहिए। उलझनें तो जीवन में अवसर है,हमारी प्रगति का अवसर,चलते रहिए। रुकिए मत, रुकिए मतगर उलझनों का सैलाब भी आ जाए,चलते रहिए। चलते चलते, धीरे धीरेसारी उलझन, सुलझन में बदल... Continue Reading →

एक दीया

आत्म-नियंत्रण का एक दीया,अपने अंतर में, जलाकर रखिए,ताकि कभी भी दुनिया के प्रलोभन,हमारे अंतर्मन में, अंधेरा न कर पाए। धैर्य का एक दीया,अपने अंतर में, जलाकर रखिए,ताकि सपनों को पाने की इच्छाएं,ज़ल्दबाज़ी में परिवर्तित न हो जाए। मन पर नियंत्रण का एक दीया,अपने अंतर में, जलाकर रखिए,ताकि दूसरों की बातों से,हमारा मन भटक न जाए।... Continue Reading →

डर को हरा दे

तुने राह चुन ही ली है,तो राह पर चलने में,संदेह क्यों करता है? मन में विश्वास जगा दे,मन से डगमगाना क्यों? राह ढूंढने में मेहनत की है,तो राह पर चलने की मेहनत से,घबराहट क्यों महसूस करता है? मन में विश्वास जगा दे,मन से डगमगाना क्यों? मन को बुलंदकर,डर को हराकर,राह पर आगे क्यों नहीं बढ़ता... Continue Reading →

हुनर पा लिया

हैरानी से पूछा करते हैं कुछ लोग मुझे,तुम हमेशा मुस्कान लिए ही फिरते रहते हो,उदास नहीं होते क्या कभी?तो मैंने मुस्कुराते हुए ही बोला। हूजूर उदास तो हम भी होते है।ज़माने ने हमें भी रुलाया है।पर हमने रोता हुआ दिलऔर होठो पर मुस्कान,ये दोनों एक साथ पेश करने का,हुनर पा लिया। सब तो मुस्कान ही... Continue Reading →

मेरा नया आशियाना

दिल,मेरा नया आशियाना!जिसमें मैं रहने लगी हूँ। पहले दिल से बहुत दूर थी,जब अपने ही जज़्बात में उलझ गई थी।अब जाकर दिल सुलझा पाया सब उलझन। दिल से जुड़ने से, खुद से जुड़ी मैं।दिल अब कुछ हांसिल करना नहीं चाहता।दिल तो बस जीना चाहता है,मेरे अपनों के साथ।

शिव मेरे शिव ( Audio with lyrics)

शिव मेरे शिव, आप को सत् सत् वंदन। आप ही भोलेनाथ और आप ही महादेव, आप ही महाकाल और आप ही आदिदेव। रूप अनेक है मेरे शिव के, सौम्य रूप भी आपका, रौद्र रूप भी आपका, नटराज रूप भी आपका। तीन हैं नेत्र शिव के, भस्म है तन पे शिव के, वस्त्र है बाघ खाल... Continue Reading →

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