जश्न का गीत

#ग़ज़ल ज़िंदगी में जश्न का गीत गुनगुनाना है,ग़मों की दास्तान सुनाना मन को भाता नहीं है। जब खुद के ही सुर पा ले यह मन,तब दूसरों से मिले ग़म की परवाह नहीं रहती है। जब खुद की ही लय में झूम उठे यह दिल,तब किसी से कोई फ़रियाद नहीं रहती है। जब खुद की ताल... Continue Reading →

दुर्गा माता के नव स्वरूप (आठवां स्वरूप)

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  • दुर्गा माता का यह स्वरूप अंत्यंत गौर है, इतने गौर जैसे की शंख या चंद्र, इसलिए इस स्वरूप को महागौरी कहा गया है।
  • दुर्गा माता का यह रूप, हमें अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए ज्ञान प्रदान करता है, एसी परिस्थितियां आती है, जब हमें पूरा बदलाव लाना पड़ता है, सोच को बदलने की जरूरत होती है, तब माता हमे ज्ञान देते है कि कैसे परिस्थिति से तालमेल लाकर जीना है।
  • महागौरी स्वरूप, हमें संकिर्ण दृष्टिकोण (Narrow perspective) से मुक्ति देता है और व्यापक दृष्टिकोण(broader perspective) का द्वार खोलता है।
  • अगर आप किसी भी मामले में या किसी भी प्रकार से भ्रमित (Confuse) है, तो महागौरी स्वरूप आप को स्पष्टता देगा।

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त्रिदेवी की आराधना का पर्व

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नवरात्री कीहार्दिक शुभकामनाएं।

नवरात्री का पर्व आया है,
नवदुर्गा शक्ति का पर्व आया है।

भक्ति के रंग में डुबना है,
आध्यात्मिक विकास करना है।

त्रिदेवी की आराधना में खुद को खो देना है,
त्रिदेवी की आराधना से खुद को संवारना है।

खुद के दु:खों से उपर उठना है,
खुद में प्रसन्नता को ढूंढना है।

काली स्वरूप तमस का प्रतीक है,
यह स्वरूप से प्रेरणा लेनी है;

मन से जड़ता दूर करनी है,
मन की कमज़ोरी दूर करनी है,
सकारात्मकता की रौशनी फैलानी है।

लक्ष्मी स्वरूप रजस का प्रतीक है,
यह स्वरूप से सिखना है;

धन को मेहनत से पाना है,
कर्म में सक्रियता व सच्चाई को लाना है,
विचारों में रचनात्मकता को लाना है।

सरस्वती स्वरूप सत्व का प्रतीक है,
यह स्वरूप से सिखना है;

खुद के अज्ञान को दूर करना है,
खुद में निर्मलता व सौम्यता को लाना है,
कला से जीवन को सजाना है।

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गणेश उत्सव

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गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं

गणेश उत्सव यानी
भक्ति का उत्सव,
गणेश जी के अनोखे स्वरुप का उत्सव;
गणेश जी के प्रतीक से प्रेरणा लेने का उत्सव,
प्रेरणा लेकर वैसे ही गुणों को विकसित करने का उत्सव;
गणेश जी की भक्ति से मन की मलिनता मिटाने का उत्सव;
गणेश जी की भक्ति से मन को निर्मल बनाने का उत्सव।

गणेश जी के अन्य ब्लॉगः

गणपति भगवान के १२ नाम और अर्थ (ગણપતિ ભગવાનના ૧૨ નામ અને અર્થ)

गणपति भगवान के प्रतीक और अर्थ (ગણપતિ ભગવાનના પ્રતીક અને અર્થ)

गणेश स्त्रोतम्

गणेश विसर्जन मंत्र और संदेश

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દત્તાત્રેય ગુરુની આરતી – સંસ્કૃત શબ્દોનું ગુજરાતીમાં અનુવાદ

જય જય જય ગુરુદેવ!વંદે અત્રિકુમારં ત્રિભુવનભર્તારમ્જનિમૃતિસંસૃતિકાલં તાપત્રયહારમ્. અર્થઃ ગુરુદેવની જય હો,અત્રિના પુત્ર દત્તાત્રેયજીને વંદન, જે ત્રણે લોકના સ્વામી છે.દત્તાત્રેય પ્રભુ લોકોનું મૃત્યુ, સંસાર કાળ અને તકલીફો બધુ જ દૂર કરી દે છે. કરુણાપારાવારં યોગિજનાધારમ્કૃતભવજલનિધિપારં ષડદર્શનસારમ્. અર્થઃ દત્તાત્રેય ગુરુ કરુણાના સાગર છે અને યોગિજનોના આધાર છે.દત્તાત્રેય પ્રભુએ સંસારની તથા સમુદ્રની ઉત્પતિ કરી છે, દત્તાત્રેય પ્રભુ ષડદર્શનનો... Continue Reading →

ગુરુ પૂર્ણિમા નિમિત્તે વિશેષ ગઝલ (गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विशेष ग़ज़ल)

ગુરુ અને શ્રદ્ધા નો મહિમા દર્શાવતી ગઝલ: આધ્યાત્મિક ગઝલ જ્યારથી શ્રદ્ધાની કૂંપળ ફુટી અંતરમાં જાણે!ત્યારથી જિંદગીની ડાળી પર કળી ખીલી ઉઠી જાણે! જ્યારથી આધ્યાત્મિક પ્રગતિનો સૂર્યોદય થયો,ત્યારથી શંકા- ગૂંચવણના વાદળ હટી ગયા જાણે! જ્યારથી ગુરુનું શરણ પામી લીધું,ત્યારથી ચિંતા આપમેળે જ છુટી ગઈ જાણે! દ્રઢ વિશ્વાસ જો ખુદ પર હોય,દરેક કાર્ય સરળ થઈ જાય જાણે!... Continue Reading →

गुरु के लिए नया नज़रिया दर्शाती हुई कविता! (दूसरा भाग)

गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं

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गुरु का महत्व- संस्कृत श्लोक (पहला भाग)

भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु (तीसरा भाग)

ગુરુ એ જ આધાર

प्रेरकः सूचकश्वैव वाचको दर्शकस्तथा ।
शिक्षको बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः ॥
भावार्थ :
प्रेरणा देनेवाले, सूचन देनेवाले, (सच) बतानेवाले, (रास्ता) दिखानेवाले, शिक्षा देनेवाले, और बोध करानेवाले – ये सब गुरु समान है ।

मैंने इस स्तोत्र से प्रेरणा लेकर एक रचना लिखी है। रचना में मैंने कहा है कि हम कैसे अपने बुरे दौर में भी सकारात्मक और गतिशील रह सकते हैं और कुछ लोगों से मिले बुरे अनुभव को भी एक आकार दे सकते हैं। जैसे कि स्तोत्र में कहा है कि हर कोई गुरु समान है, जिससे हमने कुछ सीखा है।

रचना: नया नज़रिया!

मुझे रास्ते से भटकाने के लिए,
तुमने मेरा रास्ता, कांटों से भर दिया।
पर मैंने तो कांटों पर
चलना सीख लिया।

मुझे परेशान करने के लिए,
तुमने मेरे साथ, बुरा बर्ताव किया।
पर मैंने तो धैर्य और सहनशीलता का

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