चलो छोड़ो, जाने भी दो
चलो छोड़ो, जाने भी दो
हमारे मन से, कुछ बातों को।
कब तक याद करते रहेंगे,
चोट पहुंची हुई यादों को?
बुरा वक्त था, चला गया
पतझड़ का मौसम था, चला गया।
चलो छोड़ो, जाने भी दो
हमारे मन से, कुछ बातों को।
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चलो छोड़ो, जाने भी दो
हमारे मन से, कुछ बातों को।
कब तक याद करते रहेंगे,
चोट पहुंची हुई यादों को?
बुरा वक्त था, चला गया
पतझड़ का मौसम था, चला गया।
चलो छोड़ो, जाने भी दो
हमारे मन से, कुछ बातों को।
“स्वतंत्रता मनुष्य की परम इच्छा है, स्वतंत्रता में ही मनुष्य खिल सकता है, ध्यान करने से स्वतंत्रता पाएंगे। स्वतंत्रता को तुम्हारा केन्द्र और प्रेम को तुम्हारी परिधि बन जाने दो और तुम एक संपूर्ण अस्तित्व हो जाओगे।” ओशो
जीवन की अभिव्यक्ति द्वंद्व में है। जीवन द्वंद्वात्मक है, डायलेक्टिकल है।इसलिए यहां प्रकाश है और अंधेरा है।जन्म है और मृत्यु है।अच्छा है और बुरा है।सफेद है और काला है।सुंदर है और कुरुप है।राम है और रावण है। जो जानते हैं वे कहेंगे: दोनों में उसका ही खेल है।जो हम एसा जान ले, फिर हमें अड़चन…
લઘુકાવ્ય – 8 એક સ્મિત..મીઠી યાદો માં ખોઈ દે,હતાશા ને ભુલાવી દે;ગુસ્સા ને ઓગાળી દે;મનને આનંદથી ભરી દે;કેટકેટલું કરે,એક સ્મિત.આ જ તો છે,સ્મિતની સુંદરતા. हिन्दी में भाषांतरः मुस्कान की सुंदरता (लघुकाव्य – 8) एक मुस्कान..मीठी यादों में खो देती है,कुंठा दूर कर देती है,गुस्से को पिघला देती है,मन को आनंद से भर देती है।कितना कुछ…
प्रेम को मांगते रहने के बजाय प्रेम का स्रोत बनें।प्रेम के दाता बनें। दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय प्रेरणा का स्रोत बनें।प्रेरणा के दाता बनें। ज्ञान का स्रोत बनें।स्वयं अपना नेतृत्व करें। Translation in English: Become a source of love instead of begging for love.Become a giver of love. Become a source of motivation…
ब्रह्म का अर्थ अनंत, ब्रह्मांड (चेतना) है और चारीणी का अर्थ आचरण में लाना है मतलब जिन्होंने ब्रह्म की प्राप्ति की है। यह स्वरूप पूर्ण ज्योर्तिमय स्वरूप है। श्री देवी सूक्तम स्त्रोत में एक पंक्ति है, जो ब्रह्मचारीणी स्वरूप की झलक दे जाती है। या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। अर्थात् जो देवी…
गुरु का महत्व- संस्कृत श्लोक (पहला भाग) भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु (तीसरा भाग) ગુરુ એ જ આધાર प्रेरकः सूचकश्वैव वाचको दर्शकस्तथा । शिक्षको बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः ॥भावार्थ :प्रेरणा देनेवाले, सूचन देनेवाले, (सच) बतानेवाले, (रास्ता) दिखानेवाले, शिक्षा देनेवाले, और बोध करानेवाले – ये सब गुरु समान है । मैंने इस स्तोत्र से प्रेरणा लेकर एक रचना लिखी…
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सच में बहुत याद आता है
#तेरा_चेहरा
बहुत लुभाता है
#तेरा_चेहरा
आज भी तेरी आंखें
पूछती हैं मुझसे कई
सवाल
कुछ अटपटे कुछ
बेमिसाल
वही तेरे होठों की मंद मंद
मुस्कान
तेरी नजरों का नजरिया
जैसे आसमां पे काली
बदरिया
नेह बरसाती है उम्मीदों का
हाथ पे जमजाती हो जैसे
सरसों
बहुत खूब कहा है 😊😊
Kyaa baat hai
😊😊
💐👌
दिल को समझाते हैं तो
आँखें बरसती हैं,
आँसू को बहने से रोकूँ,
तो दिल तड़पता है,
सोचते हैं भूल जाएँ सबकुछ,
मगर मधुमास बिन गुल के लाना मुश्किल,
पतझड़ से प्रेम अब मिटाना मुश्किल।
सुंदर
😊
ख़ूब
धन्यवाद 😊