महा मृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

मंत्र का अर्थ:-

ॐ- यह ईश्वर का वाचक है, परब्रह्म का प्रतिक है।

हम त्रि- नेत्र वाले (तीन आंखें) शिवजी का पूजन करते है, जो पवित्र सुगंध धारण करते है, हमे पोषित करते है (स्वास्थ्य, सुख और संपत्ति में वृद्धि करते है), जो हमारा पोषण करके शक्ति प्रदान करते है।

जैसे पका हुआ फल (ककड़ी या खीरा) अपने तने से अपने आप (सहजता से) अलग हो जाता है (स्वतंत्र हो जाता है) , वैसे हम भी इस संसार के सारे सुख भोगकर, अपने आप (सहजता से) मृत्यु और पुनर्जन्म से स्वतंत्र हो जाए, मृत्यु से मुक्ति पाकर, अमरता (मोक्ष) प्राप्त कर सके।

इस मंत्र का जाप करने का यही उद्देश्य है कि हम समय आने पर संसार के सारे बंधनों को सहजता से छोड़कर मोक्ष की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील बने और शिव भगवान से प्रार्थना करे कि हम पर ये ज्ञान प्रदान करने की कृपा करे।

इस लिए इस मंत्र का नाम महा मृत्युंजय मंत्र है मतलब मृत्यु को जीत लेना, अमर होना।

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2 comments

    1. It’s my pleasure to share this, I just love to know the meaning of mantras from our holy scriptures and like to share this knowledge. I am so glad that you like it and yes, I also heard this mantra in that song, it is a beautiful song.

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