#quotes #भक्ति #भक्ति का उद्देश्य

भक्ति का उद्देश्य कामना पूर्ति नहीं है पर कामनाओं का नाश है। कामना पूरी हो तो हम यह करेंगे यह तो व्यापार हो गया, जैसे कि कोई service का charge दे रहे है। भक्ति का मूल उद्देश्य जीवन में शिवत्व की प्राप्ति है, जीव का शिव से मिलन है, आध्यात्मिक प्रगति तभी होती है, जब... Continue Reading →

संस्कृत श्लोक अर्थ सहित (4) #नवरात्री #दुर्गा #सिद्धीदात्री

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ।। अर्थात्: आप सभी कार्यों में मंगल प्रदान करनेवाली हो, भक्त का कल्याण करने वाली हो, सभी पुरुषार्थ ( धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) को साधने वाली हो, भक्त को शरण देने वाली गौरी हो। तीन नेत्रों वाली, हे नारायणी! आप को हम नमन करते हैं। दुर्गा का नौवा स्वरूप सिद्धीदात्री है। हमें सभी... Continue Reading →

दुर्गा माता के नव स्वरूप (दूसरा स्वरूप)

ब्रह्म का अर्थ अनंत, ब्रह्मांड (चेतना) है और चारीणी का अर्थ आचरण में लाना है, मतलब जिन्होंने ब्रह्म की प्राप्ति की है। यह स्वरूप पूर्ण ज्योर्तिमय स्वरूप है। श्री देवी सूक्तम स्त्रोत में एक पंक्ति है, जो ब्रह्मचारीणी स्वरूप की झलक दे जाती है। या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। अर्थात् जो... Continue Reading →

गणेश उत्सव

गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं गणेश उत्सव यानीभक्ति का उत्सव,गणेश जी के अनोखे स्वरुप का उत्सव;गणेश जी के प्रतीक से प्रेरणा लेने का उत्सव,प्रेरणा लेकर वैसे ही गुणों को विकसित करने का उत्सव;गणेश जी की भक्ति से मन की मलिनता मिटाने का उत्सव;गणेश जी की भक्ति से मन को निर्मल बनाने का उत्सव। गणेश जी... Continue Reading →

महा मृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ मंत्र का अर्थ:- ॐ- यह ईश्वर का वाचक है, परब्रह्म का प्रतिक है। हम त्रि- नेत्र वाले (तीन आंखें) शिवजी का पूजन करते है, जो पवित्र सुगंध धारण करते है, हमे पोषित करते है (स्वास्थ्य, सुख और संपत्ति में वृद्धि करते है), जो हमारा पोषण करके... Continue Reading →

शिव मेरे शिव (Podcast)

शिव मेरे शिव,आप को सत् सत् वंदन।आप ही भोलेनाथ और आप ही महादेव,आप ही महाकाल और आप ही आदिदेव। रूप अनेक है मेरे शिव के,सौम्य रूप भी आपका,रौद्र रूप भी आपका,नटराज रूप भी आपका। तीन हैं नेत्र शिव के,भस्म है तन पे शिव के,वस्त्र है बाघ खाल का तन पे शिव के,सर्प है गले में... Continue Reading →

ગુરુ એ જ આધાર

આજે કારતક સુદ નોમ ના દિવસે પૂજ્ય રંગ અવધૂત મહારાજ ઉર્ફ પૂજ્ય બાપજી ની જન્મ જયંતી છે. દત્તાત્રેય ભગવાન મારા ગુરુ છે, પૂજ્ય રંગ અવધૂત મહારાજ સંત અવતાર છે, જેમણે સમગ્ર ગુજરાતમાં દત્ત ભક્તિ નો પ્રચાર કર્યો, જે મારા માટે ગુરુ સમાન પૂજનીય છે. આજે પવિત્ર દિવસે હુ મારા ગુરુને અમુક પંક્તિઓ સમર્પિત કરુ છુ.... Continue Reading →

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