दुर्गा माता के नव स्वरूप (सातवां स्वरूप)
दुर्गा माता का यह स्वरूप हमे बुरी शक्तियों से बचाती है, हमारा डर दूर करते है और निडर बनाकर रक्षा करते है। हमारे अज्ञान के कारण हमे जो डर लगता है, वो डर दूर करकर हमे ज्ञान प्रदान करते है।
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दुर्गा माता का यह स्वरूप हमे बुरी शक्तियों से बचाती है, हमारा डर दूर करते है और निडर बनाकर रक्षा करते है। हमारे अज्ञान के कारण हमे जो डर लगता है, वो डर दूर करकर हमे ज्ञान प्रदान करते है।
कात्याय ऋषि के आश्रम में उनकी बेटी के रूप में दुर्गा माता प्रगट हुए थे इसलिए इनको कात्यायनी कहा जाता है। यह स्वरूप अंतरज्ञान चेतना का स्वरूप है अर्थात् दुर्गा माता हमे आशीर्वाद प्रदान करते है कि हम हमारी आंतरिक सूझ बूझ ( Intuition capability) से निर्णय लेकर सफलता प्राप्त कर सके। इसी वजह से कभी…
श्री देवी सूक्तम स्त्रोत में माता के इस स्वरुप की झलक: १) या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। अर्थात् जो देवी सबकी माता के रूप में स्थित है, वो देवी को हम नमस्कार, नमस्कार और निरंतर नमस्कार कर रहे है। २) या देवी सर्वभूतेषु बुद्धि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै…
हम “कूष्माण्डा” शब्द की संधि विच्छेद करेंगे,“कू” का अर्थ है “कुछ”, “उष्मा” का अर्थ है “ताप” और “अंडा” का अर्थ है “ब्रह्मांड” मतलब थोड़ी ही उष्मा से पूरे ब्रह्मांड को उत्पन्न किया, इसलिए यह स्वरूप कूष्माण्डा के नाम से जाना जाता है। माता ने ब्रह्मांड को अपने मंद हास्य से उत्पन्न किया था इसलिए यह…
ब्रह्म का अर्थ अनंत, ब्रह्मांड (चेतना) है और चारीणी का अर्थ आचरण में लाना है मतलब जिन्होंने ब्रह्म की प्राप्ति की है। यह स्वरूप पूर्ण ज्योर्तिमय स्वरूप है। श्री देवी सूक्तम स्त्रोत में एक पंक्ति है, जो ब्रह्मचारीणी स्वरूप की झलक दे जाती है। या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। अर्थात् जो देवी…
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं गणेश उत्सव यानीभक्ति का उत्सव,गणेश जी के अनोखे स्वरुप का उत्सव;गणेश जी के प्रतीक से प्रेरणा लेने का उत्सव,प्रेरणा लेकर वैसे ही गुणों को विकसित करने का उत्सव;गणेश जी की भक्ति से मन की मलिनता मिटाने का उत्सव;गणेश जी की भक्ति से मन को निर्मल बनाने का उत्सव। गणेश जी…
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ मंत्र का अर्थ:- ॐ- यह ईश्वर का वाचक है, परब्रह्म का प्रतिक है। हम त्रि- नेत्र वाले (तीन आंखें) शिवजी का पूजन करते है, जो पवित्र सुगंध धारण करते है, हमे पोषित करते है (स्वास्थ्य, सुख और संपत्ति में वृद्धि करते है), जो हमारा पोषण करके…
शिव मेरे शिव,आप को सत् सत् वंदन।आप ही भोलेनाथ और आप ही महादेव,आप ही महाकाल और आप ही आदिदेव। रूप अनेक है मेरे शिव के,सौम्य रूप भी आपका,रौद्र रूप भी आपका,नटराज रूप भी आपका। तीन हैं नेत्र शिव के,भस्म है तन पे शिव के,वस्त्र है बाघ खाल का तन पे शिव के,सर्प है गले में…
આજે કારતક સુદ નોમ ના દિવસે પૂજ્ય રંગ અવધૂત મહારાજ ઉર્ફ પૂજ્ય બાપજી ની જન્મ જયંતી છે. દત્તાત્રેય ભગવાન મારા ગુરુ છે, પૂજ્ય રંગ અવધૂત મહારાજ સંત અવતાર છે, જેમણે સમગ્ર ગુજરાતમાં દત્ત ભક્તિ નો પ્રચાર કર્યો, જે મારા માટે ગુરુ સમાન પૂજનીય છે. આજે પવિત્ર દિવસે હુ મારા ગુરુને અમુક પંક્તિઓ સમર્પિત કરુ છુ….
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