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नया नूर आ गया

नया नूर आ गया,
चेहरे पर छा गया।
जब अपनों से,
जो गिले-शिकवे थे,
वो दूर कर दिये,
तब नया नूर छा गया।

कुछ उनकी गलती थी,
कुछ मेरी गलती थी,
जब वो समझ में आया,
तब मन से बोझ चला गया।

जब मन दूसरों को माफ करने लगा,
तब मन में शांति का निर्झर बहने लगा।
दूसरों को वो जैसे है,
वैसे ही स्वीकार कर लिया,
तब नया नूर छा गया।

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