हाइकु काव्य रचना (3)
मन ही मन,
क्यों सोचता रहेता,
कर के दिखा।
मन ही मन,
क्यों सोचता रहेता,
कर के दिखा।
जब से तूफ़ानों मेंजीने की आदत डाल ली है,तब से तूफ़ान बेअसर है, मुझ पर।अब तो तूफ़ान और मामूली हवा का झोंकाएक समान है, मेरे लिए। जब से रिश्तेदारों से अपेक्षाएंकम रखने की आदत डाल ली है,तब से मन में निरंतर शांति पा रही हूं। जब से “मन का हो तो अच्छा”और “मन का ना…
कुछ मुश्किल हालातों की धूप में,साहित्य जैसे छाँव की तरह है। कुछ अनुभवों की मानसिक थकावट में,साहित्य जैसे मन में उर्जा का संचार है। कुछ पहलुओं की उलझनों में,साहित्य जैसे सुलझन की तरह है। कुछ संकुचित मानसिकता के विष में,साहित्य जैसे अमृत की तरह है। साहित्य वाचन का बड़ा ही महत्व है, साहित्य से हमें…
ध्यान लगाना ही है,तो परमात्मा पर लगाए। किस रिश्ते से क्या नहीं मिला,उस पर ध्यान न लगाए। परमात्मा ने हमे बहुत कुछ दिया,उस पर ध्यान लगाए। जो भी मिला है, उसके लिए कृतज्ञ रहे,खूबसूरत लम्हों पर ध्यान लगाए। जो नहीं मिला है, उस पर ध्यान लगाकर,क्यों लम्हों को बदसूरत करना? ध्यान लगाना ही है,तो परमात्मा…
एक परिंदा हूँ,जीवन गगन में, आज़ाद हूँ। पहले पिंजरे में केद थी,अपनी खुशियों के लिए,दूसरों पर आश्रित थी। पहले पिंजरे में केद थी,अपने जीवन के विकास के लिए,दूसरों पर आश्रित थी। अब खुद पर एतबार है,खुद के दम पर, मेहनत करके,जीवन को उमंग से जीना है। एक परिंदा हूँ,जीवन गगन में, आज़ाद हूँ।
तुने राह चुन ही ली है,तो राह पर चलने में,संदेह क्यों करता है? मन में विश्वास जगा दे,मन से डगमगाना क्यों? राह ढूंढने में मेहनत की है,तो राह पर चलने की मेहनत से,घबराहट क्यों महसूस करता है? मन में विश्वास जगा दे,मन से डगमगाना क्यों? मन को बुलंदकर,डर को हराकर,राह पर आगे क्यों नहीं बढ़ता…
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं। नवरात्रि का पर्व आया है,नवदुर्गा शक्ति का पर्व आया है। भक्ति के रंग में डुबना है,आध्यात्मिक विकास करना है। त्रिदेवी की आराधना में खुद को खो देना है,त्रिदेवी की आराधना से खुद को संवारना है। खुद के दु:खों से उपर उठना है,खुद में प्रसन्नता को ढूंढना है। काली स्वरूप तमस का प्रतीक…
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Wah… Karmayog…
Thank you 😊😊
योग: कर्मसु कौशलम् (कुशलता से कर्म करना ही योग है।)
आपने कर्मयोग कहा तो मूझे ये याद आ गया।☺️
Bahut khoob
बहुत बहुत धन्यवाद 😊
Bahut sundar… Karm hi pooja hai..