हाइकु काव्य रचना (1)
चंचल सा है,
पर दृढ़ सा भी है,
यही मन है।
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चंचल सा है,
पर दृढ़ सा भी है,
यही मन है।
अगर…विश्वास की शम्मा जलाकर चलते हो,तो संशय से बुझने मत देना। अगर…रौशनी की उम्मीदें लेकर चलते हो,तो अंधेरे से डर मत जाना। अगर…कुछ कर गुज़रने की आग लेकर चलते हो,तो अवरोधों से डर मत जाना। अगर…जो चाहते हो, वो पाना चाहते हो,तो पीछे मत हट जाना। दृढ़ मनोबल से हीजीया जाता है जीवन। बुज़दिल होकर…
बारिश जब भी आती है,तो मेरा मन भी भीगा जाती है। बारिश की बूंदों की आवाज़कुछ और भी दे जाती है।ताल दे जाती है,ताल मेरे मन को प्रकृति में खो जाने की। बारिश की बूंदों की आवाज़कुछ और भी दे जाती है।आहट दे जाती है,आहट मेरे सपने पूरे होने की। बारिश जब भी आती है,तो…
नया नूर आ गया,चेहरे पर छा गया।जब अपनों से,जो गिले-शिकवे थे,वो दूर कर दिये,तब नया नूर छा गया। कुछ उनकी गलती थी,कुछ मेरी गलती थी,जब वो समझ में आया,तब मन से बोझ चला गया। जब मन दूसरों को माफ करने लगा,तब मन में शांति का निर्झर बहने लगा।दूसरों को वो जैसे है,वैसे ही स्वीकार कर…
तड़पता है दिलपर शब्द नहीं हैबयां करने को। ज़ख्म है ताज़ेपर शब्द नहीं हैबयां करने को। गम का सैलाब है दिलपर शब्द नहीं हैबयां करने को।
मानसिक कुंठा का एक कारण ये भी है – अभिव्यक्ति की कमी। इसलिए, मैंने इस विषय पर एक कविता लिखने की कोशिश की है। अगर हमारी भावनाओं को पूर्ण अभिव्यक्ति नहीं मिलती है, तो यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। कुंठा, मानसिक तनाव और बीमारी से बचने के लिए अवश्य अपनी भावनाओं…
અંતરના સંઘર્ષ ને હવે રોકી દઈએ,માનસિક સંઘર્ષ ને હવે રોકી દઈએ. કયા સુધી અધૂરપ અનુભવીશું? કયા સુધી કડવી યાદો ને સાચવીશું? મનમાં ભરાયેલો રોષ કાઢવો પડશે ને,કોના માટે કાઢવો પડશે? આપણા જ મન ની શાંતિ માટે,આપણા જ મન ની ખુશી માટે. સ્વીકાર માટે હવે પ્રયત્નો કરીએ,પૂર્ણતા માટે હવે પ્રયત્નો કરીએ. અપશબ્દો બોલનાર પર દયા દાખવી…
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Wah Harinaji…
Kya baat hai
Thank you😊😊