हाइकु काव्य रचना (2)
रौशनी तु है,
तेरा दिपक तु है,
तु ही सब है।
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रौशनी तु है,
तेरा दिपक तु है,
तु ही सब है।
कुछ मुश्किल हालातों की धूप में,साहित्य जैसे छाँव की तरह है। कुछ अनुभवों की मानसिक थकावट में,साहित्य जैसे मन में उर्जा का संचार है। कुछ पहलुओं की उलझनों में,साहित्य जैसे सुलझन की तरह है। कुछ संकुचित मानसिकता के विष में,साहित्य जैसे अमृत की तरह है। साहित्य वाचन का बड़ा ही महत्व है, साहित्य से हमें…
भीड़ में ही रहती हूँ,क्योंकि अकेले में रह नहीं पाती। भीड़ के माहौल में खो जाती हूँ,क्योंकि अपने गम में न खो जाऊं। नये माहौल की ही तलाश में रहती हूँ,क्योंकि जो माहौल है, वो चुभता है। हर पल घुटन है,हर पल विश्वसनीयता की कमी है,हर पल बनावटी बातें है। चुभन एक सज़ा बन चुकी…
प्रेम के जज़्बात को समझने कासलीका सिखा दिया तूने। प्रेम शब्दों का मोहताज नहीं,यह सिखा दिया तूने। शब्दों की उलझन में न रहकरनज़रअंदाज करना सिखा दिया तूने। रिश्तों को ख़ूबसूरती से जीने कासलीका सिखा दिया तूने। जब स्नेह अतूट होता है,तब शब्द मायने नहीं रखते है। प्रेम शब्दों का मोहताज नहीं,यह सिखा दिया तूने। ए…
हम मौज़ में,तो जग भी मज़े में दिखेगा। हम गम में,तो जग भी दुःख में दिखेगा। मन में बुरे विचार है,तो जग भी बुरा दिखेगा। जैसा हमारा भाव,वैसा हमारा जग। जैसी हमारी दृष्टि,वैसी हमारी सृष्टि। કવિતા નું સૌંદર્ય/ कविता का सौंदर्य लघुकाव्य-1 રાખ થઈ જાય સંબંધો / राख हो जाए रिश्तें लघुकाव्य-2 #લઘુકાવ્ય #लघुकाव्य – 3…
ख़ूबसूरत रिश्ता पति-पत्नी का (1) मैं दर्द महसूस करु,पर उसका एहसास तुम्हे भी होता है,यह एक रिश्ता पति-पत्नी का है। मैं खुशी महसूस करु,पर झूम तुम भी उठते हो,यह एक रिश्ता पति-पत्नी का है। तुम कहे बिना ही सुन लेते हो,मेरे दिल की आवाज़,यह एक रिश्ता पति-पत्नी का है। मैं सपने देखु,पर साकार तुम भी करना…
प्रेम करती हूँ तुम से,इसलिए मेरी हाँ में हाँ मिलाना, एसी ज़बरदस्ती नहीं करूंगी।सिर्फ स्व-केन्द्रित बनना ही, प्रेम नहीं। प्रेम करती हूँ मेरे अपनों से,इसलिए मेरी इच्छा पूर्ति ही करते रहो,एसी ज़बरदस्ती नहीं करूंगी।सिर्फ स्व-केन्द्रित बनना ही, प्रेम नहीं। प्रेम करती हूँ सब को,इसलिए मुक्तता देती हूँ सब को,क्योंकि प्रेम को बांधा नहीं जाता। प्रेम करती हूँ सब…
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Bilkul sahi… Sundark rachna… 🙂
bahut bahut dhanyavad