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शाकंभरी जयंती महत्व – कविता
शाकंभरी नवरात्रि का पर्व आता है तब दुर्गा देवी के शाकंभरी रूप की आराधना की जाती है। इस साल शाकंभरी नवरात्रि पौष मास की शुक्लपक्ष की अष्टमी (30 दिसम्बर, 2022) से आरंभ हुई थी और आज पौष मास की पूर्णिमा (6 जनवरी, 2023) को पूर्ण होंगी। पौष पूर्णिमा के दिन शाकंभरी जयंती मनायी जाती है।…
कबीर दोहा और अर्थ #परमार्थ #सफलता #भलाई
१)बड़ा हुआ तो क्या हुआ,जैसे पेड़ खजूर।पंथी को छाया नहीं,फल लागे अति दूर।। अर्थ: खजूर का पेड़, राही को छाया नहीं दे पाता है और उसके फल भी आसानी से नहीं मिल सकते। इसी तरह, हमारे भी कितने ही उच्च विचार हो, सफलता प्राप्त करने पर बहुत बड़े बन जाए, पर अगर हमारी क्रिया दूसरों…
हाइकु काव्य रचना (2)
रौशनी तु है, तेरा दिपक तु है, तु ही सब है।
संघर्ष की तपिश
क्यूं तू संघर्ष से घबराता है?संघर्ष ही तुझे तराशता है। जैसे आत्ममंथन करने से ज्ञान मिलता है,वैसे संघर्ष करने से अनुभव मिलता है। संघर्ष से ठोकरें खाने से अनुभव मिलेंगे,तभी तो जीवन जीने के सही तरीके मिलेंगे। संघर्ष को “सीखने के अंदाज़” से निभाएंगे,तभी तो मन की सच्ची “स्थिरता के अंदाज़” पाएंगे। संघर्ष हर पल…
कौन घबराता मुसीबतों से?
कौन घबराता मुसीबतों से?जिसको मेहनत नहीं करनी,मुसीबत को दूर नहीं करनी। दूसरों के भरोसे बैठे रहना है,खुद कुछ भी नहीं करना है। कौन घबराता मुसीबतों से?जिसको खुद पर भरोसा नहीं,कभी खुद में झांका ही नहीं। जो लोग दूसरों पर आश्रित रहते हैं,वो लोग हर मुसीबत से घबरा जाते हैं। खुद में विश्वास रखकर,खुद धैर्य से…
जश्न का गीत
#ग़ज़ल ज़िंदगी में जश्न का गीत गुनगुनाना है,ग़मों की दास्तान सुनाना मन को भाता नहीं है। जब खुद के ही सुर पा ले यह मन,तब दूसरों से मिले ग़म की परवाह नहीं रहती है। जब खुद की ही लय में झूम उठे यह दिल,तब किसी से कोई फ़रियाद नहीं रहती है। जब खुद की ताल…

