#कृतज्ञता का भाव #मेरे विचारों की माला

हमारी करनी से ही लोगों में होती है,हमारी असली पहचान।हमारी करनी से ही लोगों को होती है,हमारी असली परख। एक दूसरे की परवा करना,एक दूसरे की कदर करना,ये कथनी से नहीं बताया जा सकता है,ये करनी से ही जताया जा सकता है। एक दूसरे को समझना,एक दूसरे को सम्मान देना,ये कथनी से नहीं बताया जा…
हम ख़तरों के खिलाड़ी नहीं है,हम तो खुद एक ख़तरा है।जो हम से खेलता है,जो हमको निभा पाता है,वो खुद एक खिलाड़ी बन जाता है। 😁😄😅😃
This poem throws light on the journey of the inner self. When we think spiritually, we upgrade our thought process, feel contentment and become fearless. We become joyful and radiate joy with whoever we meet. I want to gain a spiritual eyeEyes that look for new insight,Mind that receives a new light. I want to…
चलते रहिए, चलते रहिएसारी उलझनों के साथ,चलते रहिए। करते रहिए, करते रहिएअपने कार्य (कर्तव्य) करते रहिए।चलते रहिए। उलझनें तो जीवन का हिस्सा है,उलझनों के साथ चलना,सीखते रहिए। उलझनें तो जीवन में अवसर है,हमारी प्रगति का अवसर,चलते रहिए। रुकिए मत, रुकिए मतगर उलझनों का सैलाब भी आ जाए,चलते रहिए। चलते चलते, धीरे धीरेसारी उलझन, सुलझन में बदल…
कविता वह सुरंग है जिसमें से गुज़र कर मनुष्य एक विश्व को छोड़ कर दूसरे विश्व में प्रवेश करता है ।कविता गाकर रिझाने के लिए नहीं समझ कर खो जाने के लिए है । -रामधारी सिंह दिनकर कलाकार प्रकृति का प्रेमी है अत: वह उसका दास भी है और स्वामी भी ।–रवीन्द्रनाथ ठाकुर कवि और…
बहुत सुंदर सुविचार 👌🏼👌🏼👏
आपको पसंद आया ….यह जानकर खुशी मिली…धन्यवाद 😊
जीवन में “सन्तोष” की भावना बहुत ज़रूरी है तभी इंसान खुश रह सकता है।
बहुत ही अच्छी पंक्तियां लिखा है आपने। एकदम सटीक । 💯👍💯
सराहना के लिए खूब खूब धन्यवाद आपका😊