आज का युग

पूर्व युग में भगवान को पूजते थे, और आज के युग में पैसों को पूजते है। द्वापर युग में तो कृष्ण की लीलाएं थी, और

प्रेम

  प्रेम अगर दवा है तो मर्ज भी है। प्रेम अगर सुकून है तो बैचेनी भी है। प्रेम अगर खुशी है तो दर्द भी है।

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