हमनवा बन गए

एक ही रास्ते पर चलते-चलते,
-हरिणा
हमसफ़र बन गए।
जीवन सफर में चलते-चलते,
हमनवा बन गए।

एक ही रास्ते पर चलते-चलते,
-हरिणा
हमसफ़र बन गए।
जीवन सफर में चलते-चलते,
हमनवा बन गए।
पूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदचयते।पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।। अर्थात वह पूर्ण है, यह पूर्ण है, परिपूर्णता से ही पूर्णता आती है।पूर्णता से ही पूर्णता प्राप्त करो, पूर्णता प्राप्त करनी है, यही स्मरण में रखना है। विस्तार से वर्णन: वह परमेश्वर पूर्ण है और हम वह परमेश्वर के अंश है तो हम भी पूर्ण ही है क्योंकि पूर्णता…
मत रो ना तु,दिल के ज़ख्म सब,संभाल ले तु।
एक परिंदा हूँ,जीवन गगन में, आज़ाद हूँ। पहले पिंजरे में केद थी,अपनी खुशियों के लिए,दूसरों पर आश्रित थी। पहले पिंजरे में केद थी,अपने जीवन के विकास के लिए,दूसरों पर आश्रित थी। अब खुद पर एतबार है,खुद के दम पर, मेहनत करके,जीवन को उमंग से जीना है। एक परिंदा हूँ,जीवन गगन में, आज़ाद हूँ।
पहला स्वरूप – शैलपुत्री दूसरा स्वरूप – ब्रह्मचारीणी तीसरा स्वरूप – चंद्रघंटा (सुंदरता और निर्भयता का स्वरूप) चौथा स्वरूप – कूष्माण्डा पांचवा स्वरूप – स्कन्ध माता (मातृ स्वरूप) छठा स्वरूप – कात्यायनी (अंतरज्ञान चेतना का स्वरूप) सातवां स्वरूप – कालरात्रि आठवां स्वरूप – महागौरी नौवा स्वरूप – सिद्धीदात्री
मानसिक कुंठा का एक कारण ये भी है – अभिव्यक्ति की कमी। इसलिए, मैंने इस विषय पर एक कविता लिखने की कोशिश की है। अगर हमारी भावनाओं को पूर्ण अभिव्यक्ति नहीं मिलती है, तो यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। कुंठा, मानसिक तनाव और बीमारी से बचने के लिए अवश्य अपनी भावनाओं…
लोग चाहे कितने भीझूठे-मूठे शब्दों सेअपनापन जताते हो,पर आंखें कभी झूठ नहीं बोलती है,आंखों में नीयत नज़र आ ही जाती है।
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वाह😍😍😍