क्यों रुकता है तू?
बहती नदियों को
कहा आता है थमना?
आसमां के परिंदों को
कहा आता है रुकना?
सीख ले, तू इनसे
क्यों रुकता है तू?
चाहे जो भी हो,
मत थम, मत थम।
चाहे जो भी हो,
चलता जा तू।
बहती नदियों को
कहा आता है थमना?
आसमां के परिंदों को
कहा आता है रुकना?
सीख ले, तू इनसे
क्यों रुकता है तू?
चाहे जो भी हो,
मत थम, मत थम।
चाहे जो भी हो,
चलता जा तू।
जीवन जीने के लिए विचारों में स्पष्टता बहुत आवश्यक है, हमें विचारों में स्पष्टता के साथ जीना चाहिए, मन की भ्रमित स्थिति, उलझनों के साथ, शंका के साथ नहीं जीना चाहिए बल्कि उसके समाधान की तरफ ध्यान देना चाहिए। उलझनें तो स्वाभाविक है, यह जीवन का हिस्सा है लेकिन इसे दूर करने का प्रयास ही…
जो खोया है तुने, कुछ तुझ में,वो ढूंढने के लिए तुझे,है अभिलाषा एकांत की। तेरी खोई हुई धुन पा ले,मैं दूंगी तुझे एकांत। मैं नहीं हूं स्वार्थी,कि मेरी धुन में तुझे बांध लू। मैं सारेगम अपना बनाउंगी,तू पधनीसा अपना बना ले। हम दोनों फिर,अपनी अपनी धुन गुनगुनाएंगे। हम दोनों फिर,अपनी जीवन धुन बनाएंगे। मुझे इंतज़ार…
હનુમાનજી:- ૧) હનુમાનજી – જેમના જડબા તુટેલા છે હનુમાનજીના જડબા (સંસ્કૃતમાં હનુ) ઈન્દ્રના પ્રહારથી તૂટી ગયા હતા, તેથી તેમને હનુમાનનું નામ આપવામાં આવ્યું હતું. ૨) અંજની પુત્ર – અંજની માતાના પુત્ર ૩) વાયુ પુત્ર – વાયુ દેવના પુત્ર ૪) મહાબલી – એકદમ બળવાન, સમુદ્ર પાર કરી શકનાર, હાથ પર પહાડ ઉપાડી શકનાર ૫) રામેષ્ઠ –…
स्वयंज्योति: स्वयंप्रज्ञा भवतु। हिंदी में अर्थ: स्वयं ही अपना प्रकाश बनो और स्वयं ही अपनी विवेक बुद्धि का प्रयोग कीजिए। Translation in English: Be your light by yourself and implement your wisdom by yourself in life.
नवदुर्गा माता के ९ स्वरुप हैं। मा के गर्भ में बच्चा ९ महीनें रहता हैं। जीवन के ९ रस हैं। श्रीमद् भगवद् गीता में कृष्ण भगवान ने नवधा भक्ति (भक्ति के ९ प्रकार) का उल्लेख किया हैं। सौरमंडल में स्थित ग्रहों की संख्या ९ हैं। दुर्गा माता को प्रसन्न करने के लिए जो यज्ञ किया…
“अन्नं ब्रह्म।” यह वचन उपनिषद में है, जिसका सीधा सीधा शाब्दिक अनुवाद करें तो एसा होगा कि भोजन ब्रह्म है। [अंग्रेजी में फुड इज गोड( Food is God)] पर इतने महत वचनों के सीधे सीधे शाब्दिक अनुवाद नहीं होते, एसे वचनों को समझना पड़ता है, गहराई के भाव को जानना पड़ता है। “अन्नं ब्रह्म” का…
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nice…consistency is important to get success…
Yes, correctly said by you!✌️👍
Thank u very much😊😊
वाह😮.
आपकी इस रचना से मुझे बहुत सुन्दर गाना याद आ गया…
गाड़ी बुला रही है,
जीना सिखा रही है.
चलना ही जिंदगी है,
चलतीं ही जा रही हैं!
I am so glad that you like this post!☺️
Thank you!
खूबसूरत रचना।मगर अभी का हालात रुकने को कहता है।
चलने का है नाम जिंदगी,
मगर अभी रुक जाओ।
सही बात! अभी तो रूकने में ही भलाई है।
ज़िंदगी को आगे चलाने के लिए,
अभी रूकना पड़ेगा।😊
पुनः दौड़ने के लिए प्रकृति रास्ते गढ़ रही है। कंकड़ पत्थर हैं राहों में अभी रुकना ही होगा।
सही कहा।