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आशा की शक्ति

जब हम चारों और से मुश्किलों से घिरे हुए होते हैं तब आशा, सूरज की एक किरण की तरह कार्य करती है, हमें रौशनी तक ले ही जाती है।

दिये की लौ, तब ही ज्यादा फड़फड़ाती है,जब दिया बुझने वाला होता है और जैसे सवेरा होने से पहले घनघोर अंधेरा रात का होता है, वैसे ही जब मुश्किलों का अंत नजदीक हो, तो मुश्किलें चार गुना बढ़ जाती है।

तब ही अक्सर, हम आशा का हाथ छोड़ देते हैं, पर यही वक्त है जब सबसे ज्यादा आशा रखनी है।

आशा से मुश्किल का सामना करने की क्षमता का संचार होता है, उत्साह और आत्मविश्वास का संचार होता है, इसलिए आशा में बड़ी ही शक्ति छिपी है।

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8 Comments

  1. मुश्किलों का अंत नजदीक हो, तो मुश्किलें चार गुना बढ़ जाती है…very true said..

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