हाइकु काव्य रचना (1)
चंचल सा है,
पर दृढ़ सा भी है,
यही मन है।
चंचल सा है,
पर दृढ़ सा भी है,
यही मन है।
मन ही मन,क्यों सोचता रहेता,कर के दिखा।
અંતરના સંઘર્ષ ને હવે રોકી દઈએ,માનસિક સંઘર્ષ ને હવે રોકી દઈએ. કયા સુધી અધૂરપ અનુભવીશું? કયા સુધી કડવી યાદો ને સાચવીશું? મનમાં ભરાયેલો રોષ કાઢવો પડશે ને,કોના માટે કાઢવો પડશે? આપણા જ મન ની શાંતિ માટે,આપણા જ મન ની ખુશી માટે. સ્વીકાર માટે હવે પ્રયત્નો કરીએ,પૂર્ણતા માટે હવે પ્રયત્નો કરીએ. અપશબ્દો બોલનાર પર દયા દાખવી…
अब परवाह नहीं हैकि लोग क्या कहेंगे। पहले तो मन परहावी हो जाती थीलोगों की बातें। अब मैंने मन कोमज़बूत कर लिया। जब पता चलाकि लोगों की तोदोहरी मानसिकता है। ज़मीर ही नहीं है लोगों काजैसे हवा का रुख़ बदलता हैवैसे ही लोगों के मत बदलते हैं। इसलिए अब परवाह नहीं हैकि लोग क्या कहेंगे।
शुक्रिया अदा करना चाहूंगी तुम्हारा!तुने ही मुझे आकार दिया। मेरे अल्हड़पन कोप्यार और सम्मान कीठंडक देती हुईगिली मिट्टी कोऔर थोड़ी शिस्तता लाने के लिएसख्ती के रवैये कीआग में ढालकरसमझ का आकार दिया। शुक्रिया अदा करना चाहूंगी तुम्हारा!तुने ही मुझे नया रूप दिया।
सिर्फ मैं की भावना से उपर उठेंऔर हम की भावना तरफ बढ़ें।एसा होता है रिश्ता। सिर्फ मेरी इच्छाओं से उपर उठेंऔर हमारी इच्छाओं की तरफ बढ़ें।एसा होता है रिश्ता। एक-दूसरे के साथ,ताल मिलाकर जीना,एसा होता है रिश्ता। एक-दूसरे के विचारों में,सामंजस्य बनाकर जीना,एसा होता है रिश्ता। मतभेद होना स्वाभाविक है,पर मनभेद न होने देना,एसा होता…
हम मौज़ में,तो जग भी मज़े में दिखेगा। हम गम में,तो जग भी दुःख में दिखेगा। मन में बुरे विचार है,तो जग भी बुरा दिखेगा। जैसा हमारा भाव,वैसा हमारा जग। जैसी हमारी दृष्टि,वैसी हमारी सृष्टि। કવિતા નું સૌંદર્ય/ कविता का सौंदर्य लघुकाव्य-1 રાખ થઈ જાય સંબંધો / राख हो जाए रिश्तें लघुकाव्य-2 #લઘુકાવ્ય #लघुकाव्य – 3…
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Wah Harinaji…
Kya baat hai
Thank you😊😊