हमारी शक्ति का स्रोत [संस्कृत श्लोक- (5)]

जब हम दुनियादारी की स्वार्थ वृति से टूट जाए, तब हमें यह श्लोक निस्वार्थ वृति को फैलाने की शक्ति देता है। हमें कभी अकेला महसूस नहीं होने देगा, गर विश्वास है तो ईश्वर हमारे साथ ही है क्योंकि वह हमारे भीतर ही है, हमें ही भीतर देखना है। यह श्लोक का अर्थ हम सभी को... Continue Reading →

शिव षडक्षर स्तोत्र अर्थ सहित (६ अक्षर: ॐ नमः शिवाय)

शिव भगवान का पंचाक्षर मंत्र है:नमः शिवाय।और षडक्षर मंत्र है:ॐ नमः शिवाय। मंत्र के साथ, स्तोत्र भी है। आप पंचाक्षर स्त्रोत भी पढ़ सकते है, लिंक:शिव पंचाक्षर स्तोत्र आज मैं षडक्षर स्तोत्र की जानकारी प्रदान करूंगी। स्तोत्र: ॐ कारं बिंदुसंयुक्तं नित्यं ध्यायंति योगिन:।कामदं मोक्षदं चैव ॐ काराय नमो नमः।।१।। नमंति ऋषयो देवा नमन्त्यप्सरसां गणा:।नरा नमंति... Continue Reading →

नवधा भक्ति

सनातन धर्म में भक्ति के ९ प्रकार दिये हैं, जो नवधा भक्ति कही जाती है। पढीए और सोचिए.. आप कौन से प्रकार की भक्ति करते है? १) श्रवण - भगवान की कथा, ग्रंथ, लीला आदि सुनना। २) कीर्तन - भगवान के स्तोत्र, गुणों, भजन का कीर्तन करना। ३) स्मरण - भगवान को स्मरण करना, उनकी... Continue Reading →

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