बड़ी सोच या छोटी सोच

छोड़ो,बेकार की बातें।बाहरी सुंदरता पे ही सिर्फ गौर फरमाना छोड़ो। खोलो,मन की आंखें,आंतरिक सुंदरता पे भी गौर फरमाइएं। छोड़ो,छोटी सोच को,समय सिर्फ शारीरिक सुंदरता के

सवेरा तब होगा

सवेरा तो रोज़ होता है,पर हमारा सवेरा तब होता है,जब हमारे दुर्गुणों का सूरज डूबता हैऔर सद्गुणों का सूरज उगता है। जब हम दूसरों की

1 17 18 19 20 21 49