Quote

Rush towards fulfilling the to-do list kills the beauty of work. It kills the productivity and joy of working. Work mindfully. Enjoy your work while doing it. You will get the very best results from it.Harina

संस्कृत श्लोक अर्थ सहित (4) #नवरात्रि #दुर्गा #सिद्धीदात्री

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ।। अर्थात्: आप सभी कार्यों में मंगल प्रदान करनेवाली हो, भक्त का कल्याण करने वाली हो, सभी पुरुषार्थ ( धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) को साधने वाली हो, भक्त को शरण देने वाली गौरी हो। तीन नेत्रों वाली, हे नारायणी! आप को हम नमन करते हैं। दुर्गा का नौवा स्वरूप सिद्धीदात्री है। हमें सभी... Continue Reading →

दुर्गा माता के नव स्वरूप

पहला स्वरूप - शैलपुत्री दूसरा स्वरूप - ब्रह्मचारीणी तीसरा स्वरूप - चंद्रघंटा (सुंदरता और निर्भयता का स्वरूप) चौथा स्वरूप - कूष्माण्डा पांचवा स्वरूप - स्कन्ध माता (मातृ स्वरूप) छठा स्वरूप - कात्यायनी (अंतरज्ञान चेतना का स्वरूप) सातवां स्वरूप - कालरात्रि आठवां स्वरूप - महागौरी नौवा स्वरूप - सिद्धीदात्री

देवी मंत्र / MANTRA for GODDESS (Reblog with a slight modification)

ॐ आनंदमयी चैतन्यमयी सत्यमयी परमे।अर्थात्:हे माँ, तुम आनंद का स्रोत हो, तुम चेतना का स्रोत हो,और तुम सत्य का स्रोत हो, तुम ही सर्वोच्च हो। सच्चिदानंद, यह संस्कृत शब्द का भी ध्यान किया जाता है, सच्चिदानंद का अर्थ “सत”, “चित”, “आनंद” होता है। सत का अर्थ सत्य, अस्तित्व होता है।चित का अर्थ चेतना होता है।आनंद... Continue Reading →

#चार आश्रम #सनातन धर्म #संस्कृत श्लोक

प्रथमेनार्जिता विद्या द्वितीयेनार्जितं धनं।तृतीयेनार्जितः कीर्तिः (पुण्य कमाना)चतुर्थे किं करिष्यति।। भावार्थ: जिसने भी प्रथम आश्रम (ब्रह्मचर्य) में विद्या अर्जित नहीं की है, द्वितीय आश्रम (गृहस्थ) में धन अर्जित नहीं किया है, तृतीय आश्रम (वानप्रस्थ) में कीर्ति अर्जित नहीं की है (पुण्य नहीं कमाया), वह चतुर्थ आश्रम (संन्यास) में क्या करेगा? सनातन धर्म में कर्त्तव्य पालन के... Continue Reading →

#जिगर में दम #मेरे विचारों की माला

जिसके जिगर में होता है दम,टिकने नहीं देता है उसका ग़म। इन्हें भी पढ़ें: BEAUTY/ सुंदरता एक-दूजे के लिए विचारो की माला – तन्हाई मेरे विचारों की माला #राह #बेरंग #दुनिया की शक्ल #खुद के अंदाज़

संघर्ष की तपिश

क्यूं तू संघर्ष से घबराता है?संघर्ष ही तुझे तराशता है। जैसे आत्म मंथन करने से ज्ञान मिलता है,वैसे संघर्ष करने से अनुभव मिलता है। संघर्ष से ठोकरें खाने मिलेंगी,तभी तो जीवन जीने के सही तरीके मिलेंगे। संघर्ष को "सीखने के अंदाज़" से निभाएंगे,तभी तो मन की सच्ची "स्थिरता के अंदाज़" पाएंगे। संघर्ष हर पल सक्रिय... Continue Reading →

शिव भक्ति की महिमा

शिवो भूत्वा शिवं यजेत।अर्थात्शिव बनकर ही शिव की पूजा करें। इसका यह मतलब है कि हर एक जीव शिव का ही अंश है, यह अनुभूति के साथ उनकी पूजा करें। आराधना करें तो शिव में खोकर करें। हम शिव से अलग नहीं है, हम शिव का ही अंश है, यह विचार मात्र से ही भगवान... Continue Reading →

Up ↑