तुने ही नया रूप दिया

शुक्रिया अदा करना चाहूंगी तुम्हारा!तुने ही मुझे आकार दिया। मेरे अल्हड़पन कोप्यार और सम्मान कीठंडक देती हुईगिली मिट्टी कोऔर थोड़ी शिस्तता लाने के लिएसख्ती के

खुद का साथ

कोई मुझे समझे या न समझे,मैं खुद को समझती हूँ,वो ही बहुत है। कोई मेरे विचारों को महत्व दे या न दे,मैं खुद महत्व देती

प्रेम की गरिमा

प्रेम करती हूँ तुम से,इसलिए मेरी हाँ में हाँ मिलाना,  एसी ज़बरदस्ती नहीं करूंगी।सिर्फ स्व-केन्द्रित बनना ही, प्रेम नहीं। प्रेम करती हूँ मेरे अपनों से,इसलिए मेरी इच्छा

दिल की दास्तां

दिल की दास्तां,जब सुनाने बैठे उनको,तब वक्त गुजरता गया,पर बातें न रूकी। दबे हुए थे सारे जज़्बात,मेरे दिल में।दबे हुए थे सारे दर्द,मेरे दिल में।बैचेन

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