#संस्कृत श्लोक अर्थ सहित (3) #एकमत होना # विवाद से मुक्त #कर्तव्य पालन

सं गच्छध्वं सं वदध्वं, सं वो मनांसि जानताम् ।देवा भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते ।। अर्थात्:हम मनुष्यो को (सं गच्छध्वम्) मिलकर चलना चाहिए। (सं वदध्वम्) मिलकर बोलना चाहिए। हमारे मन एक प्रकार के विचार करें, जैसे प्राचीन देवो या विद्वानों ने एकमत होकर अपने - अपने भाग को स्वीकार किया, इसी प्रकार हम भी एकमत... Continue Reading →

नैवेद्य मंत्र अर्थ सहित (2) (सभी देवी-देवताओं को भोग लगाने का मंत्र)

नैवेद्य मंत्र अर्थ सहित (1) (कृष्ण भगवान को भोग लगाने का मंत्र) शर्करा-खण्ड-खाद्यानि दधि-क्षीर-घृतानि च ।आहारम्‌ भक्ष्य-भोज्यम्‌ च नैवेद्यम्‌ प्रति-गृह्यताम्‌ ॥ अर्थात्: शर्करा-खण्ड ,खाध पदार्थ दही, दूध, घी जैसी खाने की वस्तुओं से युक्त भोजन आप ग्रहण करें। संस्कृत अन्नवर्ग शब्दावली:शर्करा-खण्ड - बताशा आदि मिठाईदधि - दहीक्षीर- दूधघृत - घी Buy Now: Jivan Ke ShabdAmazon... Continue Reading →

नैवेद्य मंत्र अर्थ सहित (1) (कृष्ण भगवान को भोग लगाने का मंत्र)

त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये।गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर।। अर्थात् हे गोविन्द, आपका ही सब दिया हुआ है, जो आपको ही समर्पित कर रहे हैं,हे परमेश्वर, आपके मुख के सामने जो भी है, उसे प्रसन्नता से ग्रहण करें। अन्य संस्कृत ब्लॉग: उपनिषद वचन #संस्कृत #योग / SANSKRIT QUOTES WITH MEANING (3) अच्छे स्वास्थ्य के लिए... Continue Reading →

संस्कृत सुभाषित अर्थ सहित (3) #मूर्खो के पांच लक्षण #five signs of fools

मूर्खस्य पञ्चचिह्नानि गर्वो दुर्वचनं तथा।क्रोधस्य दृढ़वादश्च परवाक्येष्वनादर।। Translation in English: Murkhsya panchchinhani garvo durvachan tathaKrodhsya dradhvadashcha parvakyesnadar. There are five signs of fools - Pride, abusive language, anger, stubborn arguments and disrespect for other people's opinion.Fools used to live in arrogance, they get angry very easily and lose their temper, stupid people use abusive language,... Continue Reading →

सरस्वती द्वादश नामावली अर्थ सहित (सरस्वती देवी के १२ नाम)

प्रथमं भारती नाम द्वितीयं च सरस्वती।तृतीयं शारदा देवी चतुर्थं हंसवाहिनी।। पंचमं जगतीख्याता षष्ठं वागीश्वरी तथा।कौमारी सप्तमं प्रोक्ता अष्ठमं ब्रह्मचारिणी।। नवमं बुद्धिदात्री च दशमं वरदायिनी।एकादशं चंद्कांति द्वादशं भुवनेश्वरी।। ब्राह्या: द्वादश नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्तर:।जिह्वाग्रे वसते नित्यं ब्रह्मारूपा सरस्वती।। १२ नाम के अर्थ: १) भारती - वाणी की देवी २) सरस्वती - ज्ञान की देवी ३) शारदा... Continue Reading →

नया नज़रिया! (दूसरा भाग)

प्रेरकः सूचकश्वैव वाचको दर्शकस्तथा । शिक्षको बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः ॥भावार्थ :प्रेरणा देनेवाले, सूचन देनेवाले, (सच) बतानेवाले, (रास्ता) दिखानेवाले, शिक्षा देनेवाले, और बोध करानेवाले – ये सब गुरु समान है । मैंने इस स्तोत्र से प्रेरणा लेकर एक रचना लिखी है। रचना में मैंने कहा है कि हम कैसे अपने बुरे दौर में भी सकारात्मक... Continue Reading →

गुरु का महत्व- संस्कृत श्लोक (पहला भाग)

(1)गुकारस्त्वन्धकारस्तु रुकार स्तेज उच्यते । अन्धकार निरोधत्वात् गुरुरित्यभिधीयते ॥  भावार्थ : 'गु'कार याने अंधकार, और 'रु'कार याने तेज; जो अंधकार का (ज्ञान का प्रकाश देकर) निरोध करता है, वही गुरु कहा जाता है । (2)किमत्र बहुनोक्तेन शास्त्रकोटि शतेन च । दुर्लभा चित्त विश्रान्तिः विना गुरुकृपां परम्।।  भावार्थ : बहुत कहने से क्या ? करोडों शास्त्रों... Continue Reading →

मधुराष्टकम् (अर्थ सहित)

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥१॥ वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् ।चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥२॥ वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥३॥ गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम् ।रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥४॥ करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम् ।वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥५॥ गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥६॥ गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम् ।दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥७॥ गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥८॥ भावार्थ: (हे कृष्ण!) आपके होंठ मधुर हैं, आपका मुख मधुर है, आपकी आंखें मधुर हैं, आपकी मुस्कान मधुर है, आपका हृदय मधुर है, आपका जाना भी मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ।।1।।आपका बोलना मधुर है, आपका चरित्र मधुर हैं, आपके... Continue Reading →

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