कृष्ण रस

रसो वै स:।अर्थात्वह परमात्म तत्व रस स्वरूप है। कृष्ण यानी प्रेम, आनंद और शृंगार रस से ओतप्रोत।कृष्ण यानी अनंत आनंद स्वरूप।कृष्ण रस से अद्भुत रस

स्वास्थ्य- पहली ज़िम्मेदारी

चलो!एक ज़िम्मेदारी,खुद के लिए उठाए। दूसरों की खुशी का,तो ख़्याल रखते हैं। चलो!अब से खुद कीखुशी का भी ख़्याल रखें। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए,व्यायाम करें।

ख़ूबसूरत रिश्ता

वो रिश्ता ही कुछ ऐसा है,जिसमें लेने से ज़्यादा,देने में मज़ा मिलता है।वो एक रिश्ता पति-पत्नी का है। जिसमें प्यार की कली खिली हो,जिसमें प्यार

हम नासमझ है

ज़िंदगी ने हमें, सब कुछ दिया,बेहतर ज़िंदगी के लिए, सब कुछ दिया। पेड़-पौधें, ज़मीन, पानी, हवाप्रकृति देकर एहसान किया। पर हम नासमझ है,प्रकृति को प्रदूषित

एक परिंदा

एक परिंदा हूँ,जीवन गगन में, आज़ाद हूँ। पहले पिंजरे में केद थी,अपनी खुशियों के लिए,दूसरों पर आश्रित थी। पहले पिंजरे में केद थी,अपने जीवन के

उलझनें – जीवन का हिस्सा

चलते रहिए, चलते रहिएसारी उलझनों के साथ,चलते रहिए। करते रहिए, करते रहिएअपने कार्य (कर्तव्य) करते रहिए।चलते रहिए। उलझनें तो जीवन का हिस्सा है,उलझनों के साथ चलना,सीखते

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