हाइकु काव्य रचना (8)

दिल की खुशी
मुस्कान बनकर,
छलकती है।
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दिल की खुशी
मुस्कान बनकर,
छलकती है।
कड़वे बोल न चुने,मीठे बोल चुने। मिठास को बढ़ाए,रिश्तों को निभाए। मन में कड़वाहट न रखें,मन में बड़प्पन रखें। जीवन निखर जाएगा,रिश्ता संवर जाएगा,वाणी पर संयम से। My Book Now Available on Amazon Kindle अन्य ब्लॉग:बारिश की बूंदें શબ્દોની કમાલ / शब्दों की कमाल કવિતા નું સૌંદર્ય/ कविता का सौंदर्य लघुकाव्य-1 રાખ થઈ જાય સંબંધો /…
जब हम दुनियादारी की स्वार्थ वृति से टूट जाए, तब हमें यह श्लोक निस्वार्थ वृति को फैलाने की शक्ति देता है। हमें कभी अकेला महसूस नहीं होने देगा, गर विश्वास है तो ईश्वर हमारे साथ ही है क्योंकि वह हमारे भीतर ही है, हमें ही भीतर देखना है। यह श्लोक का अर्थ हम सभी को…
भीड़ में ही रहती हूँ,क्योंकि अकेले में रह नहीं पाती। भीड़ के माहौल में खो जाती हूँ,क्योंकि अपने गम में न खो जाऊं। नये माहौल की ही तलाश में रहती हूँ,क्योंकि जो माहौल है, वो चुभता है। हर पल घुटन है,हर पल विश्वसनीयता की कमी है,हर पल बनावटी बातें है। चुभन एक सज़ा बन चुकी…
शुक्रिया अदा करना चाहूंगी तुम्हारा!तुने ही मुझे आकार दिया। मेरे अल्हड़पन कोप्यार और सम्मान कीठंडक देती हुईगिली मिट्टी कोऔर थोड़ी शिस्तता लाने के लिएसख्ती के रवैये कीआग में ढालकरसमझ का आकार दिया। शुक्रिया अदा करना चाहूंगी तुम्हारा!तुने ही मुझे नया रूप दिया।
This poem is written by Mr. Laxman Kapadia. He is my friend’s father. He loves to express via poetry. Uncle has written so many poems. Here is one of the poem in Gujarati Language. Enjoy reading. Kindly suggests your thoughts about this poem. I would love to hear from you! Gist of the poem in…
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