सेवाभावी कार्य

जैसे फूलों की महक
मन को प्रसन्न करती है,
वैसे अपने सेवाभावी कार्यो की महक से
दूसरों के मन को प्रसन्नता दे।
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जैसे फूलों की महक
मन को प्रसन्न करती है,
वैसे अपने सेवाभावी कार्यो की महक से
दूसरों के मन को प्रसन्नता दे।
(आदि शंकराचार्य द्बारा रचित- संस्कृत भाषा में) वीताखिल-विषयेच्छं जातानंदाश्र पुलकमत्यच्छम्।सीतापति दूताधं वातात्मजमध भावये हधम्।।१।। तरुणारूण मुख-कमलं करुणा-रसपूर पूरितापांगम्।संजीवनमाशासे मंजूल- महिमानमंजना भाग्यम्।।२।। शंबरवैरि- शरातिगमंबुजदल विपुल लोचनोदारम्।कंबुगलमनिलदिष्टम् विम्ब- ज्वलितोष्ठमेकमवलंबे।।३।। दूरिकृत- सीतार्ति प्रकटिकृत रामवैभव स्फूर्ति:।दारित-दशमुखकीर्ति: पुरतो मम भातु हनुमतो मूर्ति:।।४।। वानर निकराध्यक्षम् दानव कुलकुमुद रविकर सद्द्क्षम्।दीन-जनावन-दीक्षं पवनतप: पाकपुंजमद्वाक्षम्।।५।। एतत्पवनसुतस्य स्त्रोतं य: पठति पंचरत्नाख्यं।चिरमिह-निखिलान् भोगान् भूंकत्वा श्रीरामभक्तिभाग्भवति।।६।। (स्तोत्र का…
ख़ूबसूरत रिश्ता पति-पत्नी का (1) मैं दर्द महसूस करु,पर उसका एहसास तुम्हे भी होता है,यह एक रिश्ता पति-पत्नी का है। मैं खुशी महसूस करु,पर झूम तुम भी उठते हो,यह एक रिश्ता पति-पत्नी का है। तुम कहे बिना ही सुन लेते हो,मेरे दिल की आवाज़,यह एक रिश्ता पति-पत्नी का है। मैं सपने देखु,पर साकार तुम भी करना…
कुछ मुश्किल हालातों की धूप में,साहित्य जैसे छाँव की तरह है। कुछ अनुभवों की मानसिक थकावट में,साहित्य जैसे मन में उर्जा का संचार है। कुछ पहलुओं की उलझनों में,साहित्य जैसे सुलझन की तरह है। कुछ संकुचित मानसिकता के विष में,साहित्य जैसे अमृत की तरह है। साहित्य वाचन का बड़ा ही महत्व है, साहित्य से हमें…
ध्यान लगाना ही है,तो परमात्मा पर लगाए। किस रिश्ते से क्या नहीं मिला,उस पर ध्यान न लगाए। परमात्मा ने हमे बहुत कुछ दिया,उस पर ध्यान लगाए। जो भी मिला है, उसके लिए कृतज्ञ रहे,खूबसूरत लम्हों पर ध्यान लगाए। जो नहीं मिला है, उस पर ध्यान लगाकर,क्यों लम्हों को बदसूरत करना? ध्यान लगाना ही है,तो परमात्मा…
पहला स्वरूप – शैलपुत्री दूसरा स्वरूप – ब्रह्मचारीणी तीसरा स्वरूप – चंद्रघंटा (सुंदरता और निर्भयता का स्वरूप) चौथा स्वरूप – कूष्माण्डा पांचवा स्वरूप – स्कन्ध माता (मातृ स्वरूप) छठा स्वरूप – कात्यायनी (अंतरज्ञान चेतना का स्वरूप) सातवां स्वरूप – कालरात्रि आठवां स्वरूप – महागौरी नौवा स्वरूप – सिद्धीदात्री
Constructive criticism and destructive criticism Constructive criticism is essential for our enhancement; it doesn’t ruin our mental state, which provides a chance to improve. Focus on it with your intelligence. However, destructive criticism is like dust. It disturbs our peace of mind and makes our mental health suffer. Don’t give attention to it. Blow the…
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Khubsurat vichar.
सराहना के लिए आपका बहुत धन्यवाद☺️