नया नज़रिया! (दूसरा भाग)

प्रेरकः सूचकश्वैव वाचको दर्शकस्तथा । शिक्षको बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः ॥भावार्थ :प्रेरणा देनेवाले, सूचन देनेवाले, (सच) बतानेवाले, (रास्ता) दिखानेवाले, शिक्षा देनेवाले, और बोध करानेवाले –

#International Day of Yoga #संस्कृत मंत्र से, योग का महत्व

पतंजलि प्रार्थना योगेन चित्तस्य पदेन वाचांमलं शरीरस्य च वैद्यकेन ।योऽपाकरोत्तमं प्रवरं मुनीनां पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोऽस्मि ॥ हिंदी में अनुवाद: मन की चित्त वृत्तियों को को योग से, वाणी को व्याकरण से और शरीर की अशुद्धियों को आयुर्वेद

द्वंद्व से भरा जीवन!

जीवन की अभिव्यक्ति द्वंद्व में है। जीवन द्वंद्वात्मक है, डायलेक्टिकल है।इसलिए यहां प्रकाश है और अंधेरा है।जन्म है और मृत्यु है।अच्छा है और बुरा है।सफेद

उपनिषद वचन

“अन्नं ब्रह्म।” यह वचन उपनिषद में है, जिसका सीधा सीधा शाब्दिक अनुवाद करें तो एसा होगा कि भोजन ब्रह्म है। [अंग्रेजी में फुड इज गोड(

पूर्णता का नया जहां

एक नया जहां बसाएं,जिसमें पूर्णता की रौशनी हो,जिसमें पूर्णता की चांदनी हो। प्रेममय बन जाने से,सिर्फ प्रेम को बांटने से,पूर्णता का एहसास होगा। प्रेम को

तुम्हारा साथ

तुम्हारा साथ मतलब खूबसूरत पल। तुम्हारा साथ मतलबआज के लिए, बहुत सारी खुशियां,कल के लिए, बहुत सारी यादें। तुम्हारा साथ, मुझे उर्जा देता है,जैसे फूलों

दृढ़ मनोबल

अगर…विश्वास की शम्मा जलाकर चलते हो,तो संशय से बुझने मत देना। अगर…रौशनी की उम्मीदें लेकर चलते हो,तो अंधेरे से डर मत जाना। अगर…कुछ कर गुज़रने

मिलन की प्यास

प्यार के मिलन की राह में,तकती है ये आंखें। दो दिलों के मिलन की राह में,तकती है ये आंखें। मिलन हो,तो जैसे मंज़िल पाएं। मिलन

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