चलो आज....किसी और से नहींं,खुद से बातें करे।खुद के कार्य पे नज़र डाले,खुद के विचारों पे नज़र डाले,खुद से हुई भूलों को पहचाने,खुद से ही भूलों को सुधारे। चलो आज.... किसी और का नहीं, खुद का मूल्यांकन करे। खुद को जानने से ही, जीवन में होगा सुर, वरना होगा बेसुरा। चलो आज....एक आदत बनाए।थोड़े थोड़े... Continue Reading →
नये साल की शुभकामनाएं
जीवन में कोई एक ही रंग नहीं है, अलग अलग कई रंग हैं, जिससे हमारी दुनिया खूबसूरत रहती है। तंदुरुस्त सेहत, खुशी, मानसिक शांति, सुख-समृद्धि ,सपने देखना और साकार करना, निराशा-जनक परिस्थिति में हिंमत और हौसलें का रंग और जीवन की गति में प्रगति का रंग। नया साल, आपके जीवन में ये सारे रंग भर... Continue Reading →
दीपावली की शुभकामनाएं #संस्कृत प्रार्थना
प्रार्थना:-असतो मा सदगमय।तमसो मा ज्योतिर्गमय।मृत्योमामृतम् गमय।ॐ शांति शांति शांति।।अर्थात्हमको असत्य से सत्य की ओर ले चलों।अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलों।मृत्यु से अमरता की ओर ले चलों।ॐ शांति शांति शांति।।दीपावली मतलब प्रकाश का पर्व, हम यह प्रार्थना करके अपने अंदर ज्योति प्रगटाए और सिर्फ बहार ही प्रकाश का अनुभव न करकर, अपने भीतर भी... Continue Reading →
दुर्गा माता के नव स्वरूप (नौवा स्वरूप)
दुर्गा माता का यह स्वरूप हमे सिद्धियां देने वाला स्वरूप है। इसलिए यह नाम सिद्धीदात्री कहलाता है। दुर्गा माता हमे हमारी मेहनत का फल देते है और हमारी मनोकामनाएं पूर्ण करते है। भक्ति की शक्ति का स्वरूप है, असंभव कार्य को भी संभव बना देने वाला स्वरूप है। सिद्धीदात्री रूप हमें हमारी प्रतिभा को निखारने... Continue Reading →
दुर्गा माता के नव स्वरूप (आठवां स्वरूप)
दुर्गा माता का यह स्वरूप अंत्यंत गौर है, इतने गौर जैसे की शंख या चंद्र इसलिए इस स्वरूप को महागौरी कहा गया है। दुर्गा माता का यह रूप हमें अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए ज्ञान प्रदान करता है। एसी परिस्थितियां आती है जब हमें पूरा बदलाव लाना पड़ता है। सोच को बदलने की... Continue Reading →
दुर्गा माता के नव स्वरूप (सातवां स्वरूप)
काल (समय) का नाश करने वाला स्वरूप। अंधकार रूपी अज्ञान का विनाश करने वाला स्वरूप। असुरी शक्ति का विनाश करने वाला कालरात्रि स्वरूप है। दुर्गा माता का यह स्वरूप हमे बुरी शक्तियों से बचाती है, हमारा डर दूर करते है और निडर बनाकर रक्षा करते है। हमारे अज्ञान के कारण हमे जो डर लगता है,... Continue Reading →
दुर्गा माता के नव स्वरूप ( छठा स्वरूप)
कात्याय ऋषि के आश्रम में उनकी बेटी के रूप में दुर्गा माता प्रगट हुए थे इसलिए इनको कात्यायनी कहा जाता है। यह स्वरूप अंतरज्ञान चेतना का स्वरूप है अर्थात् दुर्गा माता हमे आशीर्वाद प्रदान करते है कि हम हमारी आंतरिक सूझ बूझ ( Intuition capability) से निर्णय लेकर सफलता प्राप्त कर सके। इसी वजह से कभी... Continue Reading →
दुर्गा माता के नव स्वरूप(पांचवा स्वरूप) (मातृ स्वरूप)
स्कन्ध का मतलब भगवान कार्तिकेय की माता है, इसलिए यह स्वरूप स्कन्ध माता के स्वरुप से कहा जाता है। दुर्गा माता का यह स्वरूप मातृ स्वरूप है, हम सब की माँ है। कला और विज्ञान (Arts and Science) इन्ही से उत्पन्न हुए है। श्री देवी सूक्तम स्त्रोत में माता के इस स्वरुप की झलक: १)... Continue Reading →
दुर्गा माता के नव स्वरूप ( चौथा स्वरूप)
हम "कूष्माण्डा" शब्द की संधि विच्छेद करेंगे,"कू" का अर्थ है "कुछ", "उष्मा" का अर्थ है "ताप" और "अंडा" का अर्थ है "ब्रह्मांड" मतलब थोड़ी ही उष्मा से पूरे ब्रह्मांड को उत्पन्न किया, इसलिए यह स्वरूप कूष्माण्डा के नाम से जाना जाता है। माता ने ब्रह्मांड को अपने मंद हास्य से उत्पन्न किया था इसलिए यह... Continue Reading →
