पिंजरा या स्वतंत्रता (CAGE OR FREEDOM)

मैं यहां दो दृष्टिकोणों के बारे में बात करूंगी।

पहला दृष्टिकोण यह है कि लोगों को अपने मुताबिक़ नियंत्रित करने से हम खुद को ही भावनात्मक बंधन के पिंजरे में ले जाते हैं।

एसा इसलिए होता है क्योंकि हमारी इच्छा लोग पूरी करते हैं तो हम खुश होते हैं और नहीं करते हैं तो हम दुखी हो जाते हैं, इस तरह से हम अपनी खुशी और गम के लिए, दूसरों पर निर्भर रहते हैं और हम खुद ही भावनात्मक रूप से पिंजरे में आ जाते हैं।

दूसरा दृष्टिकोण यह है कि हम लोगों को वो जैसे है वैसे ही स्वीकार करते हैं, तो हम भावनात्मक रूप से स्वतंत्र होते हैं।

इसका कारण यह है कि हम मन से आज़ाद रहते हैं, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग हमारी इच्छा पूरी करेंगे या नहीं। कोई डर नहीं रहता कि लोग हमारी इच्छा पूरी नहीं करेंगे तो हम दुखी हो जाएंगे क्योंकि हम अपनी खुशी और ग़म के लिए खुद ज़िम्मेदार हो जाते हैं, यही सोच हमें पूर्णता महसूस करवाती हैं, मानसिक रूप से या भावनात्मक रूप से स्वतंत्र बनाती हैं, जिससे हम एक आज़ाद परिंदे की तरह जीवन जी सकते हैं।

पहला दृष्टिकोण हमें भावनात्मक रूप से पिंजरे की ओर ले जा रहा है और दूसरा दृष्टिकोण हमें भावनात्मक रूप से स्वतंत्रता की ओर ले जा रहा है।

आप क्या चुनते हैं?
पिंजरा या स्वतंत्रता?

लोगों को नियंत्रित न करें।
लोगों को अपने हिसाब से ही रहने दें।

Translation in English:

I will talk about two perspectives here.

The first perspective is to control people around you leads to you in an emotional bondage cage.

It happens because if people fulfil our desires, we are happy and vice-versa. In this way, we depend on others for our happiness and sorrow and create an emotional cage for ourselves.

The second perspective is to accept people as they are, sets you to be emotionally free.

It happens because we become free from the mind, no matter whether people will fulfil our wish or not. There is no fear that people will not fulfil our desire and we will be sad because we become responsible for our happiness and sorrow by our own, this thinking leads us to feel bliss, mentally or emotionally independent, We can live our life like a free bird.

The first perspective leads us towards emotional cage while the second perspective leads us towards emotional freedom.

What do you choose?
Cage or Freedom?


Don’t control people as per your choice.
Let allow them to be themselves.

3 comments

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s