शब्द अलग, पर अर्थ समान

अल्लाह की इबादत होती है,
भगवान की प्रार्थना होती है।

शब्द अलग-अलग हैं,
पर अर्थ समान है।

तो शब्दों की भिन्नता,
शब्दों तक ही सीमित ना रहकर,
क्यों भावनाओं तक पहुंच गई है?

7 comments

  1. बहुत ही सही लिखा है आपने | एक कड़वा सच है यह | 
    शब्दों की भिन्नता यूँही नहीं पहुँची भावनाओं तक, पहुंचाई गयी है राजनीति और धर्म के ठेकेदारों द्वारा |  हम आम लोग बिना सोचे समझें उनका अनुसरण करे रहते हैं | 
    समय मिले तो इस लिंक पर जाएँ, ऐसा ही कुछ लिखने का मेरा प्रयास था | 
    https://rkkblog1951.wordpress.com/2018/09/12/geeta-n-quran/  

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