नयी सुबह
जो आरजू थी मेरी,
उसको पा लिया।
पाने के बाद की,
पहली सुबह आई।
तो कुछ एसा
हाल हुआ हमारा।
नयी किरण लेकर,
नयी सुबह आई।
कैसा है खिला नया जहां,
जिसमें है नूर नया।
जुमु मै, नाचु मै, गाउ मै,
खिलखिलाती जाउ मै।
नया दौर है ये,
जिसमे है नयी सुबह।
This is a demo store for testing purposes — no orders shall be fulfilled. Dismiss
जो आरजू थी मेरी,
उसको पा लिया।
पाने के बाद की,
पहली सुबह आई।
तो कुछ एसा
हाल हुआ हमारा।
नयी किरण लेकर,
नयी सुबह आई।
कैसा है खिला नया जहां,
जिसमें है नूर नया।
जुमु मै, नाचु मै, गाउ मै,
खिलखिलाती जाउ मै।
नया दौर है ये,
जिसमे है नयी सुबह।
क्या ये कोई सिर्फ प्यारा एहसास है?या प्यार होने का ही ये एहसास है?पता ही न चले। क्या है नज़रों का जुकना?या मन के तरंगों का उठना?पता ही न चले। क्या है मन का चहकना?या सांसों का महकना?पता ही न चले। है ये एहसास की डोर,है जिसने बांधा, मेरा मन।है जिसने सजाया, मेरा मन। प्यारा…
આ મારા વ્હાલા નેઆ મારા અળખામણા,આવી મનોવૃત્તિ હતી પહેલા.પણ જ્યારથી અંતર માં હું જપ્રેમ ના પુષ્પો ખીલવી ને,પ્રેમ ની સુગંધ વેરુ છું,ત્યારથી બધા જ મને વ્હાલા લાગે છે! हिंदी में अनुवाद पहले मुझे कुछ लोग प्यारे थे,और कुछ लोग प्यारे नहीं थे,कुछ एसी थी, मेरी मनोवृत्ति।पर जब से प्रेम के फूल,खिले हैं अंतर में मेरे,तब…
प्रेम के जज़्बात को समझने कासलीका सिखा दिया तूने। प्रेम शब्दों का मोहताज नहीं,यह सिखा दिया तूने। शब्दों की उलझन में न रहकरनज़रअंदाज करना सिखा दिया तूने। रिश्तों को ख़ूबसूरती से जीने कासलीका सिखा दिया तूने। जब स्नेह अतूट होता है,तब शब्द मायने नहीं रखते है। प्रेम शब्दों का मोहताज नहीं,यह सिखा दिया तूने। ए…
शाकंभरी नवरात्रि का पर्व आता है तब दुर्गा देवी के शाकंभरी रूप की आराधना की जाती है। इस साल शाकंभरी नवरात्रि पौष मास की शुक्लपक्ष की अष्टमी (30 दिसम्बर, 2022) से आरंभ हुई थी और आज पौष मास की पूर्णिमा (6 जनवरी, 2023) को पूर्ण होंगी। पौष पूर्णिमा के दिन शाकंभरी जयंती मनायी जाती है।…
परमात्मा से प्रीति होना, उनमें ही खो जाना और जीवन जीना – यही सार है, इस ख़ूबसूरत कविता का।यह कविता प्रेम रस और भक्ति रस से ओतप्रोत है। मैंने जब यह रचना पढ़ी, मुझे बेहद ख़ूबसूरत लगी, जो मैं आप सबके साथ साझा करना चाहती हूँ। कविता: वेणी में तारक-फूल गूंथ,निशि ने मेरा शृंगार किया;राका-शशि…
मत रो ना तु,दिल के ज़ख्म सब,संभाल ले तु।
Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.
वो जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को है मालूम,
के सुबह आने में कितने ज़माने लगते हैं।।
वाह! बिलकुल सच कहा।
शुभप्रभात बहना
शुभप्रभात 🙏
बेहद उम्दा💐😊
😊😊🙏
bahut hi umda……apki rachnayen padh raha hun aur meri kavitawon ke mukhde bante jaa rahen hain…….kyaa kahne.
चाँद वही धरती,सूरज भी,
खुशियां क्या समझाऊं कैसे,
तुम आये संग बदल गया सब,
क्या बदला बतलाऊँ कैसे|
ये तो बहुत खुशी की बात है मेरे लिए
कि आप को प्रेरणा मिले कविता बनाने की😊😊