परिवार की रौनक ( Poem in Hindi Language)

आंख लग गई मेरी निंदिया में,

नींद दे गई निंदिया रानी,

और दे गई एक प्यारा सपना.

सपने में देखा मैंने,

एक खुशहाल जिंदगी है,

हसता खेलता एक परिवार है,

प्यार सम्मान के तोहफे है,

विश्वास की एक डोर है!

फिर अचानक आवाज आई कुछ,

और उड गई नींद,

तूट गया सपना और दिखाई पडी हकीकत!

अपने ही हमसे दुरियां बनाते है,

साजिशों के खैल रचते है,

मन के अरमानों को कुचलते है,

अपनों को ठुकराकर, परायों को पूजते है!

आंसु ला गई आंखों में ये हकीकत,

मुस्कुराहट के लिए क्या अब

सपनों का सहारा लेना पड़ेगा?

जिंदगी बहुत छोटी है!

नशा कर जिंदगी जीने का,

नशा चढ़ा तो अपनों को प्रोत्साहित करने का,

नशा छोड तो लोगो की वाहवाही लेने का!

सता तूझे चाहिए, घर पे राज करना है,

तो शौक से कर तु, किसने रोका,

पर अपनों को दबाकर नहीं,

बल्कि अपनों के दिलों पे राज करके.

फिर देख तु,

इस ज़मी पे जन्नत पायेगा,

अपनों को पाके निखर जायेगा तु.

अपनों को पाके सवर जायेगा तु!

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2 thoughts on “परिवार की रौनक ( Poem in Hindi Language)

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