#प्रेम #स्वतंत्रता
“स्वतंत्रता मनुष्य की परम इच्छा है, स्वतंत्रता में ही मनुष्य खिल सकता है, ध्यान करने से स्वतंत्रता पाएंगे।
स्वतंत्रता को तुम्हारा केन्द्र और प्रेम को तुम्हारी परिधि बन जाने दो और तुम एक संपूर्ण अस्तित्व हो जाओगे।”
ओशो
“स्वतंत्रता मनुष्य की परम इच्छा है, स्वतंत्रता में ही मनुष्य खिल सकता है, ध्यान करने से स्वतंत्रता पाएंगे।
स्वतंत्रता को तुम्हारा केन्द्र और प्रेम को तुम्हारी परिधि बन जाने दो और तुम एक संपूर्ण अस्तित्व हो जाओगे।”
ओशो
श्री देवी सूक्तम स्त्रोत में माता के इस स्वरुप की झलक: १) या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। अर्थात् जो देवी सबकी माता के रूप में स्थित है, वो देवी को हम नमस्कार, नमस्कार और निरंतर नमस्कार कर रहे है। २) या देवी सर्वभूतेषु बुद्धि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै…
ચંચળ મન!મનનું તો કામ જ છે ભટકવાનું. ક્યાં ભટકે એ પાછુ,જ્યાં ભાવનાત્મક આઘાત મળ્યા હોય એ તરફ. જે માણસોએ માનસિક પીડા આપી હોય,એ તરફ જ ભટકશે આ મન. જે પરિસ્થિતિઓથી તકલીફ પડી હોય,એ તરફ જ ભટકશે આ મન. જે કશુ મેળવી ન શક્યા હોય,એ તરફ જ ભટકશે આ મન. જ્યારે જ્યારે ભટકે, આ ચંચળ મન,ત્યારે…
जो आरजू थी मेरी,उसको पा लिया। पाने के बाद की,पहली सुबह आई। तो कुछ एसाहाल हुआ हमारा। नयी किरण लेकर,नयी सुबह आई। कैसा है खिला नया जहां,जिसमें है नूर नया। जुमु मै, नाचु मै, गाउ मै,खिलखिलाती जाउ मै। नया दौर है ये,जिसमे है नयी सुबह।
वो हमे बता रहे हैकि उन्होने ये किया,उन्होने वो कियाऔर हमे पूछ रहे हैकि तुम ने क्या किया?कुछ भी तो नहीं किया। तो हमने भी जवाब दिया।हमने जो भी किया है,उसका आपकी तरह,ढिंढोरा नहीं पीटा है।आपकी तरह हमे,प्रसिद्धी पाने की चाहत नहीं है। जो भी किया है,जिसके लिए किया है,वो सब जानता हैऔर यही काफी…
हम ख़तरों के खिलाड़ी नहीं है,हम तो खुद एक ख़तरा है।जो हम से खेलता है,जो हमको निभा पाता है,वो खुद एक खिलाड़ी बन जाता है। 😁😄😅😃
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wonderful quote shared
Thank you for liking it..it is really so wonderful quote!
बहुत सुंदर वचन…👌
😊🙏🙏
Hi Harina…how r you! I loved your awesome thoughts….
Hiiiiii uncle..I am fine..thanks for your appreciation!
Beautiful sharing
😊😊