“अन्नं ब्रह्म।” यह वचन उपनिषद में है, जिसका सीधा सीधा शाब्दिक अनुवाद करें तो एसा होगा कि भोजन ब्रह्म है। [अंग्रेजी में फुड इज गोड( Food is God)] पर इतने महत वचनों के सीधे सीधे शाब्दिक अनुवाद नहीं होते, एसे वचनों को समझना पड़ता है, गहराई के भाव को जानना पड़ता है। “अन्नं ब्रह्म” का... Continue Reading →
कुछ बातें, यूँ ही..! (6) #आशिक़ाना अंदाज़
(1)जब तेरी गली से,गुज़रने का मौका मिला,तब खुशी तो मिली। पर तेरी एक झलक भी ,नसीब में न थी,यह देखकर,ग़म दस्तक दे गया। हमने एक साथखुशी और ग़मदोनों का अनुभव कर लिया। (2)जैसे कोई फूलों से खुशबू मिटा नहीं सकता,वैसे मेरे दिल से तुम्हारा नाम कोई मिटा नहीं सकता। अन्य पोस्ट: कुछ बातें, यूँ ही..!(1)... Continue Reading →
कौन घबराता मुसीबतों से?
कौन घबराता मुसीबतों से?जिसको मेहनत नहीं करनी,मुसीबत को दूर नहीं करनी। दूसरों के भरोसे बैठे रहना है,खुद कुछ भी नहीं करना है। कौन घबराता मुसीबतों से?जिसको खुद पर भरोसा नहीं,कभी खुद में झांका ही नहीं। जो लोग दूसरों पर आश्रित रहते हैं,वो लोग हर मुसीबत से घबरा जाते हैं। खुद में विश्वास रखकर,खुद धैर्य से... Continue Reading →
दुर्गा माता के नव स्वरूप
पहला स्वरूप - शैलपुत्री दूसरा स्वरूप - ब्रह्मचारीणी तीसरा स्वरूप - चंद्रघंटा (सुंदरता और निर्भयता का स्वरूप) चौथा स्वरूप - कूष्माण्डा पांचवा स्वरूप - स्कन्ध माता (मातृ स्वरूप) छठा स्वरूप - कात्यायनी (अंतरज्ञान चेतना का स्वरूप) सातवां स्वरूप - कालरात्रि आठवां स्वरूप - महागौरी नौवा स्वरूप - सिद्धीदात्री
देवी मंत्र / MANTRA for GODDESS (Reblog with a slight modification)
ॐ आनंदमयी चैतन्यमयी सत्यमयी परमे।अर्थात्:हे माँ, तुम आनंद का स्रोत हो, तुम चेतना का स्रोत हो,और तुम सत्य का स्रोत हो, तुम ही सर्वोच्च हो। सच्चिदानंद, यह संस्कृत शब्द का भी ध्यान किया जाता है, सच्चिदानंद का अर्थ “सत”, “चित”, “आनंद” होता है। सत का अर्थ सत्य, अस्तित्व होता है।चित का अर्थ चेतना होता है।आनंद... Continue Reading →
#चार आश्रम #सनातन धर्म #संस्कृत श्लोक
प्रथमेनार्जिता विद्या द्वितीयेनार्जितं धनं।तृतीयेनार्जितः कीर्तिः (पुण्य कमाना)चतुर्थे किं करिष्यति।। भावार्थ: जिसने भी प्रथम आश्रम (ब्रह्मचर्य) में विद्या अर्जित नहीं की है, द्वितीय आश्रम (गृहस्थ) में धन अर्जित नहीं किया है, तृतीय आश्रम (वानप्रस्थ) में कीर्ति अर्जित नहीं की है (पुण्य नहीं कमाया), वह चतुर्थ आश्रम (संन्यास) में क्या करेगा? सनातन धर्म में कर्त्तव्य पालन के... Continue Reading →
#जिगर में दम #मेरे विचारों की माला
जिसके जिगर में होता है दम,टिकने नहीं देता है उसका ग़म। इन्हें भी पढ़ें: BEAUTY/ सुंदरता एक-दूजे के लिए विचारो की माला – तन्हाई मेरे विचारों की माला #राह #बेरंग #दुनिया की शक्ल #खुद के अंदाज़
संघर्ष की तपिश
क्यूं तू संघर्ष से घबराता है?संघर्ष ही तुझे तराशता है। जैसे आत्म मंथन करने से ज्ञान मिलता है,वैसे संघर्ष करने से अनुभव मिलता है। संघर्ष से ठोकरें खाने मिलेंगी,तभी तो जीवन जीने के सही तरीके मिलेंगे। संघर्ष को "सीखने के अंदाज़" से निभाएंगे,तभी तो मन की सच्ची "स्थिरता के अंदाज़" पाएंगे। संघर्ष हर पल सक्रिय... Continue Reading →
शिव भक्ति की महिमा
शिवो भूत्वा शिवं यजेत।अर्थात्शिव बनकर ही शिव की पूजा करें। इसका यह मतलब है कि हर एक जीव शिव का ही अंश है, यह अनुभूति के साथ उनकी पूजा करें। आराधना करें तो शिव में खोकर करें। हम शिव से अलग नहीं है, हम शिव का ही अंश है, यह विचार मात्र से ही भगवान... Continue Reading →
