प्रेम को मांगते रहने के बजाय प्रेम का स्रोत बनें।प्रेम के दाता बनें।दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय प्रेरणा का स्रोत बनें।प्रेरणा के दाता बनें।ज्ञान का स्रोत बनें।स्वयं अपना नेतृत्व करें। Translation in English: Become a source of love instead of begging for love.Become a giver of love.Become a source of motivation instead of depending... Continue Reading →
उलझनों से स्पष्टता की तरफ़!
जीवन जीने के लिए विचारों में स्पष्टता बहुत आवश्यक है, हमें विचारों में स्पष्टता के साथ जीना चाहिए, मन की भ्रमित स्थिति, उलझनों के साथ, शंका के साथ नहीं जीना चाहिए बल्कि उसके समाधान की तरफ ध्यान देना चाहिए। उलझनें तो स्वाभाविक है, यह जीवन का हिस्सा है लेकिन इसे दूर करने का प्रयास ही... Continue Reading →
कबीर दोहा और अर्थ #परमार्थ #सफलता #भलाई
१)बड़ा हुआ तो क्या हुआ,जैसे पेड़ खजूर।पंथी को छाया नहीं,फल लागे अति दूर।। अर्थ: खजूर का पेड़, राही को छाया नहीं दे पाता है और उसके फल भी आसानी से नहीं मिल सकते। इसी तरह, हमारे भी कितने ही उच्च विचार हो, सफलता प्राप्त करने पर बहुत बड़े बन जाए, पर अगर हमारी क्रिया दूसरों... Continue Reading →
एसा होता है रिश्ता! (It’s all about togetherness!)
सिर्फ मैं की भावना से उपर उठेंऔर हम की भावना तरफ बढ़ें।एसा होता है रिश्ता। सिर्फ मेरी इच्छाओं से उपर उठेंऔर हमारी इच्छाओं की तरफ बढ़ें।एसा होता है रिश्ता। एक-दूसरे के साथ,ताल मिलाकर जीना,एसा होता है रिश्ता। एक-दूसरे के विचारों में,सामंजस्य बनाकर जीना,एसा होता है रिश्ता। मतभेद होना स्वाभाविक है,पर मनभेद न होने देना,एसा होता... Continue Reading →
कुछ बातें, यूँ ही..!(4) #ख़्वाहिश #ख्याली पुलाव
ख़्वाहिश करते हो, तो पूरा करने की कोशिश भी करते रहो। ख्याली पुलाव पकाने से कुछ नहीं मिलेगा, उस दिशा में चलने से कुछ प्राप्त होगा। कुछ पाना चाहते हो,तो दिल में आग लगानी पड़ेगी।आग लगाकर तड़पना पड़ेगा,तड़प लगाकर टिकना पड़ेगा। जो कुछ भी पाना चाहते हैं, वो टिकने से ही मिलेगा।
कृष्ण रस
उपनिषद में रस के बारे में कहा गया है, रसो वै स:।अर्थात्वह परमात्म तत्व रस स्वरूप है। कृष्ण यानी प्रेम, आनंद और शृंगार रस से ओतप्रोत।कृष्ण यानी अनंत आनंद स्वरूप।कृष्ण रस से अद्भुत रस कोई भी नहीं है। कृष्ण के नाम और अर्थ: कृष्ण - सबको अपनी और आकर्षित करने वाला।मोहन - सम्मोहित करने वाला।मनोहर... Continue Reading →
स्वास्थ्य- पहली ज़िम्मेदारी
चलो!एक ज़िम्मेदारी,खुद के लिए उठाए। दूसरों की खुशी का,तो ख़्याल रखते हैं। चलो!अब से खुद कीखुशी का भी ख़्याल रखें। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए,व्यायाम करें। मानसिक स्वास्थ्य के लिए,ध्यान करें। भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए,सकारात्मक दृष्टिकोण रखें। सच्ची दौलत और सच्चा सुख,इसी में छिपा है। पहली ज़िम्मेदारी स्वास्थ्य है,यह कभी न भूलें।
क्यों रुकता है तू?
बहती नदियों कोकहा आता है थमना? आसमां के परिंदों कोकहा आता है रुकना? सीख ले, तू इनसेक्यों रुकता है तू? चाहे जो भी हो,मत थम, मत थम। चाहे जो भी हो,चलता जा तू।
नज़रों का जादू
कुछ इस कदर, आप से नज़रें मिलीकि हम शर्म से पानी-पानी हो गये,हम आप में ही खो गये। आप की नज़रों का जादूजो चला हम परकि हम सवरने लगे। दबे अरमां जगने लगे,सपने सजाने लगे,सारे दर्द मिटने लगे। कुछ इस कदर, आप से नज़रें मिलीकि हम, हम ना रहे,हम आप में ही खो गये।
