कबीर दोहा और अर्थ #परमार्थ #सफलता #भलाई


१)
बड़ा हुआ तो क्या हुआ,
जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं,
फल लागे अति दूर।।

अर्थ:

खजूर का पेड़, राही को छाया नहीं दे पाता है और उसके फल भी आसानी से नहीं मिल सकते।

इसी तरह, हमारे भी कितने ही उच्च विचार हो, सफलता प्राप्त करने पर बहुत बड़े बन जाए, पर अगर हमारी क्रिया दूसरों को ठंडक ना दे, दूसरों को परेशान कर दे, हमारी सफलता किसी के काम न आए, सेवा न कर सके, तो हमारा अस्तित्व किसी काम का नहीं रहता।

२)
धन रहै ना जोबन रहै,
रहै ना गाम ना धाम।
कबीर जग मे जश रहै,
कर दे किसी का काम।।

अर्थ :

धन, यौवन, संपत्ति, जमीन कुछ भी नहीं रहता। सभी क्षणिक एंव नाशवान हैं।
केवल यश रह जाता है यदि आपने किसी की भलाई की हो।


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