हे देवी-देवता 🙏 हमें आशीर्वाद दें, हम एसे चरित्र निर्माण करेंकि जिस राह को चुने,उस पर नीति से चले,श्रद्धा और परिश्रम से कदम बढ़ाते रहें। हम एसी सोच का निर्माण करेकि मन का विश्वास आंतरिक है, बाह्य नहीं,दूसरों पर आधारित न रहें,आत्मविश्वास और आत्मबल से कदम बढ़ाते रहें। आप से बस यही प्रार्थना है। प्रभात... Continue Reading →
ममता के कई रूप #Happy Women’s Day
स्त्री का हर रूप, ममता की मूरत है,बेटी हो या बहन, पत्नी हो या माँ हो,हर रूप ममता से छलकता है। एक बेटी अपने पिता कीहर छोटी-छोटी बात का ख्याल रखती है,ये ममता का ही रूप है। एक लड़की अपने भाई पर,बेशुमार प्यार लुटाती है,ये ममता का ही रूप है। एक स्त्री अपने परिवार कीपूरे... Continue Reading →
नया नूर आ गया
नया नूर आ गया,चेहरे पर छा गया।जब अपनों से,जो गिले-शिकवे थे,वो दूर कर दिये,तब नया नूर छा गया। कुछ उनकी गलती थी,कुछ मेरी गलती थी,जब वो समझ में आया,तब मन से बोझ चला गया। जब मन दूसरों को माफ करने लगा,तब मन में शांति का निर्झर बहने लगा।दूसरों को वो जैसे है,वैसे ही स्वीकार कर... Continue Reading →
इश्वर याचना
जो तेरा ही है,वो तुझे अर्पण। हे ईश्वर, हे जगत पिताहम तुझे क्या दे सकते हैं? हमारा कुछ भी नहीं,तूने ही सब सर्जन किया है। गर प्रकृति से कुछ अर्पण करें,हमनें कहां प्रकृति को बनाया है?तूने ही ये सब सर्जन किया है। जो तेरा ही है,वो तुझे अर्पण। हम सिर्फ प्रेम-भाव ही दे सकते हैं,हम... Continue Reading →
विचारों में परिवर्तन
हर पल नया है,हर पल नये बनो तुम। एक ही सोच पर चलोगे,तो कहीं थम जाओगे तुम। समय के परिवर्तन के साथ,विचारों को परिवर्तित करो तुम। नये नये अनुभवों से,नयी सोच बनाओ तुम। समय के परिवर्तन के साथ,प्रकृति में भी परिवर्तन आता है। तुम्हारे भीतर भी परिवर्तन कीरौशनी जगाओ तुम। नयी उंचाई को छूनेनयी राह... Continue Reading →
Keys to overcoming bondage (बंधन से आज़ादी)
No one outside ourselves can rule us inwardly. When we know this, we become free.Buddha Everyone seeks freedom, whatever puts you in bondage is always energy drainer and in contrast, whatever sets you free is pleasing, acts as an energy refill agent. Here I am talking about some keys or tips to achieve freeness inwardly... Continue Reading →
भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु (तीसरा भाग)
भगवान दत्तात्रेय ने 24 गुरु बनाए। वे कहते थे कि जिस किसी से भी जितना सीखने को मिले, हमें अवश्य ही उन्हें सीखने का प्रयत्न अवश्य करना चाहिए। उनके 24 गुरुओं में वेश्या, बालक, चंद्रमा, कुमारी कन्या, कबूतर, पृथ्वी, सूर्य, वायु, मृग, समुद्र, पतंगा, हाथी, आकाश, जल, मधुमक्खी, मछली, टीटोड़ी पक्षी, अग्नि, सर्प, तीर (बाण)... Continue Reading →
गुरु के लिए नया नज़रिया दर्शाती हुई कविता! (दूसरा भाग)
गुरु का महत्व- संस्कृत श्लोक (पहला भाग) भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु (तीसरा भाग) ગુરુ એ જ આધાર प्रेरकः सूचकश्वैव वाचको दर्शकस्तथा । शिक्षको बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः ॥भावार्थ :प्रेरणा देनेवाले, सूचन देनेवाले, (सच) बतानेवाले, (रास्ता) दिखानेवाले, शिक्षा देनेवाले, और बोध करानेवाले – ये सब गुरु समान है । मैंने इस स्तोत्र से प्रेरणा लेकर एक रचना लिखी... Continue Reading →
भिन्नता का रंग
हर दिन एक सा नहीं,हर दिन की अलग कहानी। एक दिन प्रसन्नता में बितता है,तो एक दिन खिन्नता दस्तक दे जाती है। एक दिन उत्साह में बितता है,तो एक दिन बोरियत दस्तक दे जाती है। एक दिन अनुकूलता में बितता है,तो एक दिन प्रतिकूलता दस्तक दे जाती है। एक दिन स्पष्ट परिस्थितियों में बितता है,तो... Continue Reading →
