कुछ लोगों को मंज़िल देर से मिलती है,एक-दो प्रयास में नहीं मिलती,पर बार बार प्रयास करने पर मिलती है।जब हार हार कर वो फिर से चलते हैं,तब कहीं जाकर मंज़िल मिलती है। पता है क्यों? क्योंकि मंज़िल तक पहुंचने के लिए,जो यात्रा करते हैं वो,वो यात्रा उनको खास तरह से तैयार कर रही होती हैताकि... Continue Reading →
मेरे विचारों की माला #राह #बेरंग #दुनिया की शक्ल #खुद के अंदाज़
लोग जिस राह पर चलाना चाहते हैं, उस राह पर ज़बरदस्ती से चलकर हम बेरंग हो जाते है पर खुद की इच्छाओं को जानकर, खुद के रंगों को जानकर, राह चुनेंगे तो ज़िंदगी में खूबसूरती का रंग होगा। दुनिया की शक्ल में ढलकर बेरंग नहीं होना है,पर खुद के अंदाज़ में रहकर खुद के रंग... Continue Reading →
निराशा का अंधकार मत चुनो
क्यों सोचते हो, आत्महत्या के बारे में?सोचो अपनों के और चाहनेवालों के बारे में। तुम अकेले नहीं हो,तुम्हारा परिवार और दोस्त भी हैं। जीवन में हर तरह का संघर्ष है,इसलिए हमारे मन में मानसिक शक्ति है,मानसिक शक्ति से संघर्ष को दूर करो। जीवन में हर तरह की तकलीफें है,इसलिए हमारे भीतर हौसला है,हौसले से तकलीफों... Continue Reading →
मेरे विचारों की माला
#आशीर्वाद विचारों की माला के अन्य पोस्ट: स्वयं अपना नेतृत्व करें (BE YOUR OWN LEADER ) अश्क विरोधाभासी व्यवहार पर कुछ पंक्तियां रिश्तों को गहरा बनाने का तरीका / RELATIONSHIP MANTRA दिल में आग (SET YOUR SOUL WITH FIRE)
जीवन में साहित्य की महिमा
कुछ मुश्किल हालातों की धूप में,साहित्य जैसे छाँव की तरह है। कुछ अनुभवों की मानसिक थकावट में,साहित्य जैसे मन में उर्जा का संचार है। कुछ पहलुओं की उलझनों में,साहित्य जैसे सुलझन की तरह है। कुछ संकुचित मानसिकता के विष में,साहित्य जैसे अमृत की तरह है। साहित्य वाचन का बड़ा ही महत्व है, साहित्य से हमें... Continue Reading →
#मन के भाव #विचारो की माला
किसी के मन के भाव जानने है,तो हर बार शब्दों की ही ज़रूरत नहीं पड़ती। किसी को समझने के लिए, इच्छा होनी चाहिए,किसी को परखने के लिए, नज़र होनी चाहिए। तो किसी के मन के भाव,दिल से भी पढ़ें जा सकते है। विचारो की माला के अन्य ब्लॉग: विचारो की माला- गिरने का डर (सवाल-जवाब... Continue Reading →
पूर्वाग्रह का चश्मा
गर आपको किसी को समझने में ग़लतफ़हमी हुई हो,तो यह बात मान लीजिएगा कि उस व्यक्ति को परखने में आपने ही कही "पूर्वाग्रह का चश्मा" पहना होगा। बेवजह तो ग़लतफ़हमी नहीं होती है। दूसरों पर ऊंगली करने से पहले,खुद अपने बर्ताव पे भी नज़र करना,खुद अपने मन के भाव पर भी नज़र करना। अगली बार... Continue Reading →
#प्रेम #स्वतंत्रता
"स्वतंत्रता मनुष्य की परम इच्छा है, स्वतंत्रता में ही मनुष्य खिल सकता है, ध्यान करने से स्वतंत्रता पाएंगे।स्वतंत्रता को तुम्हारा केन्द्र और प्रेम को तुम्हारी परिधि बन जाने दो और तुम एक संपूर्ण अस्तित्व हो जाओगे।"ओशो
पिंजरा या स्वतंत्रता (CAGE OR FREEDOM)
मैं यहां दो दृष्टिकोणों के बारे में बात करूंगी। पहला दृष्टिकोण यह है कि लोगों को अपने मुताबिक़ नियंत्रित करने से हम खुद को ही भावनात्मक बंधन के पिंजरे में ले जाते हैं। एसा इसलिए होता है क्योंकि हमारी इच्छा लोग पूरी करते हैं तो हम खुश होते हैं और नहीं करते हैं तो हम... Continue Reading →
