जीवन में साहित्य की महिमा

कुछ मुश्किल हालातों की धूप में,
साहित्य जैसे छाँव की तरह है।

कुछ अनुभवों की मानसिक थकावट में,
साहित्य जैसे मन में उर्जा का संचार है।

कुछ पहलुओं की उलझनों में,
साहित्य जैसे सुलझन की तरह है।

कुछ संकुचित मानसिकता के विष में,
साहित्य जैसे अमृत की तरह है।

साहित्य वाचन का बड़ा ही महत्व है, साहित्य से हमें जीवन को सुंदरता से जीने की प्रेरणा मिलती है। साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है, समाज को एवं हमारी संस्कृति को दिशा दिखाता है। साहित्य सर्जन का मूल उद्देश्य लोककल्याण की भावना और मार्गदर्शक बनने का है।

2 comments

  1. साहित्य कोई खिलौना नहीं है जो सब खेल लेंगे
    साहित्य कोई खाना नहीं है जो सब पचा लेंगे
    साहित्य तो ज़िंदगी है जो ज़िंदगी जिने का सलिका सिखाती है

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