5 comments

  1. बहुत खूब।
    मगर
    ताज्जुब है जो प्रेम का कद्र नही करते हैं,
    ये अश्क भी अक्सर उनके लिए ही छलकते हैं,

  2. बहुत खूब।
    मगर
    ताज्जुब है जो प्रेम का कद्र नही करते हैं,
    ये अश्क भी अक्सर उनके लिए ही छलकते हैं।

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