विचारो की माला
कर ले तू अपनी मनमानी,
पर रोक तू, मुझे ना पाएगा,
मुझे अपने मन की करने में।
कर ले तू अपनी मनमानी,
पर रोक तू, मुझे ना पाएगा,
मुझे अपने मन की करने में।
चेहरे के पीछे चेहरा,एक ही व्यक्ति के दो चेहरे। जो उसकी तारीफें करता फिरे,उसके साथ अच्छा वाला चेहरा। वाहवाही लुटने का मज़ा,जो आता है उसे। जो उसकी तारीफें ना करे,उसके साथ अलग चेहरा। जो उसकी जी-हज़ूरी करता फिरे,उसके साथ अच्छा वाला चेहरा। अहंकार से भरा हुआ,है जो उसका मन। जो उसकी जी-हज़ूरी ना करे,उसके साथ…
मैं इस ब्लॉग में “मेरी अंतिम यात्रा” किताब के बारे में साझा करना चाहुंगी। यह किताब आशीष कुमार (ShankySalty) ने लिखी है। https://ashish05shanky.wordpress.com/ हमारी मृत्यु निश्चित है, यह सत्य हम जानते है पर समझते नहीं है। अगर हम यह सत्य की गहराई में जाये तो जीवन सार्थक हो सकता है। जीवन की बहुत सारी व्यथा…
दिल,मेरा नया आशियाना!जिसमें मैं रहने लगी हूँ। पहले दिल से बहुत दूर थी,जब अपने ही जज़्बात में उलझ गई थी।अब जाकर दिल सुलझा पाया सब उलझन। दिल से जुड़ने से, खुद से जुड़ी मैं।दिल अब कुछ हांसिल करना नहीं चाहता।दिल तो बस जीना चाहता है,मेरे अपनों के साथ।
शुक्रिया अदा करना चाहूंगी तुम्हारा!तुने ही मुझे आकार दिया। मेरे अल्हड़पन कोप्यार और सम्मान कीठंडक देती हुईगिली मिट्टी कोऔर थोड़ी शिस्तता लाने के लिएसख्ती के रवैये कीआग में ढालकरसमझ का आकार दिया। शुक्रिया अदा करना चाहूंगी तुम्हारा!तुने ही मुझे नया रूप दिया।
ध्यान लगाना ही है,तो परमात्मा पर लगाए। किस रिश्ते से क्या नहीं मिला,उस पर ध्यान न लगाए। परमात्मा ने हमे बहुत कुछ दिया,उस पर ध्यान लगाए। जो भी मिला है, उसके लिए कृतज्ञ रहे,खूबसूरत लम्हों पर ध्यान लगाए। जो नहीं मिला है, उस पर ध्यान लगाकर,क्यों लम्हों को बदसूरत करना? ध्यान लगाना ही है,तो परमात्मा…
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Indeed 👏 👏
Beshaq.
तु ×तू*/मूझे×मुझे=बहुत अचछा लिखा है पर मात्राऐं……
I am so glad by knowing the correct one! Thank you for sharing☺️☺️
Welcome,dear!!🌷
ohhhh nooo!!