हाइकु काव्य रचना (5)
प्रेम में ही है,
छिपी जीवन डोर,
न तोड उसे।
प्रेम में ही है,
छिपी जीवन डोर,
न तोड उसे।
बसंत ऋतु है तो पतझड़ भी तो है,बेवजह तो नहीं है,यह कुदरत का क्रम है। तेरी अगर बनती है,तो बिगड़ेगी भी।तो फिर क्यों निराश है?यह कुदरत का क्रम है। तुझे गिरने के बाद बस उठना है,उठने के बाद फिर से प्रयत्न करना है,फिर से तेरी प्रगति होगी।यह कुदरत का क्रम है। बसंत ऋतु है तो…
चलो आज….किसी और से नहींं,खुद से बातें करे।खुद के कार्य पे नज़र डाले,खुद के विचारों पे नज़र डाले,खुद से हुई भूलों को पहचाने,खुद से ही भूलों को सुधारे। चलो आज…. किसी और का नहीं, खुद का मूल्यांकन करे। खुद को जानने से ही, जीवन में होगा सुर, वरना होगा बेसुरा। चलो आज….एक आदत बनाए।थोड़े थोड़े…
भीड़ में ही रहती हूँ,क्योंकि अकेले में रह नहीं पाती। भीड़ के माहौल में खो जाती हूँ,क्योंकि अपने गम में न खो जाऊं। नये माहौल की ही तलाश में रहती हूँ,क्योंकि जो माहौल है, वो चुभता है। हर पल घुटन है,हर पल विश्वसनीयता की कमी है,हर पल बनावटी बातें है। चुभन एक सज़ा बन चुकी…
है इश्क में डूबे से हम,बने है जब से हमसफ़र हम। मैं छलकती हूँ,शब्दों से।वो छलकता है,खामोशियों से। मुझे अच्छा लगता है,उसकी ख़ामोशी की गहराई में डूबना।उसे अच्छा लगता है,मेरे शब्दों की चंचलता में डूबना। है इश्क में डूबे से हम,बने है जब से हमसफ़र हम।
मानसिक कुंठा का एक कारण ये भी है – अभिव्यक्ति की कमी। इसलिए, मैंने इस विषय पर एक कविता लिखने की कोशिश की है। अगर हमारी भावनाओं को पूर्ण अभिव्यक्ति नहीं मिलती है, तो यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। कुंठा, मानसिक तनाव और बीमारी से बचने के लिए अवश्य अपनी भावनाओं…
अलग-अलग रंग सुंदरता को दर्शाते है,चलिए! इस होली में रंगों से जीवन को सुंदर बनाए। मन से मानसिक दुर्बलता दूर करे,कपट, घृणा व शत्रुता दूर करे;मन को सबल बनाए। अपनो से हुए गिले-शिकवे से उपर उठकर,मन को सुंदर रंगों से सजाएं;निस्वार्थ और निष्कपट के रंग से सजाएं। आप सब को होली की ढेर सारी शुभकामनाएं।
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अति सुन्दर
धन्यवाद 😊