हाइकु काव्य रचना(4)
पेड़ पौधे में,
छिपा हुआ जीवन,
पेड़ को बोए।
पेड़ पौधे में,
छिपा हुआ जीवन,
पेड़ को बोए।
चेहरे के पीछे चेहरा,एक ही व्यक्ति के दो चेहरे। जो उसकी तारीफें करता फिरे,उसके साथ अच्छा वाला चेहरा। वाहवाही लुटने का मज़ा,जो आता है उसे। जो उसकी तारीफें ना करे,उसके साथ अलग चेहरा। जो उसकी जी-हज़ूरी करता फिरे,उसके साथ अच्छा वाला चेहरा। अहंकार से भरा हुआ,है जो उसका मन। जो उसकी जी-हज़ूरी ना करे,उसके साथ…
ममता रस प्रेम रस से भरा, मनभावन!
અંતર માં સુગંધ પ્રસરી છે,પ્રસન્નતા ની આજે!જાણે કે પરમ આનંદ નાં,પુષ્પો ખીલ્યાં છે આજે! हिंदी में अनुवाद अंतर महक उठा है,प्रसन्नता से आज!जैसे कि परम आनंद के फूल खिले हो आज!
पहले जब हम से ख़ता हो जाती थी,चाहे कैसी भी ख़ता हो,तुम नज़रअंदाज़ कर देते थे,कभी भी हम से दूर ना हुए। पर आज जब हम से ख़ता हो जाती है,चाहे छोटी सी भी क्यों ना हो,तुम हम से दूर जाने के बहानें ढूंढने लगे हो,तुम दूरियां बढ़ाने लगे हो। पहले तो तुम्हारी नज़रों में,हम…
कुछ इस कदर, आप से नज़रें मिलीकि हम शर्म से पानी-पानी हो गये,हम आप में ही खो गये। आप की नज़रों का जादूजो चला हम परकि हम सवरने लगे। दबे अरमां जगने लगे,सपने सजाने लगे,सारे दर्द मिटने लगे। कुछ इस कदर, आप से नज़रें मिलीकि हम, हम ना रहे,हम आप में ही खो गये।
बसंत ऋतु है तो पतझड़ भी तो है,बेवजह तो नहीं है,यह कुदरत का क्रम है। तेरी अगर बनती है,तो बिगड़ेगी भी।तो फिर क्यों निराश है?यह कुदरत का क्रम है। तुझे गिरने के बाद बस उठना है,उठने के बाद फिर से प्रयत्न करना है,फिर से तेरी प्रगति होगी।यह कुदरत का क्रम है। बसंत ऋतु है तो…
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Satya vachan… 🙂