हाइकु काव्य रचना(4)
पेड़ पौधे में,
छिपा हुआ जीवन,
पेड़ को बोए।
पेड़ पौधे में,
छिपा हुआ जीवन,
पेड़ को बोए।
https://harinapandya.com/wp-content/uploads/2020/02/khol-de-baahein-song.mp3 Hello to all, this is my first post with having audio of one of the songs and a few lines from my heart. This post-credit goes to vj.sadhak, https://vjsadhak.wordpress.com/ my fellow blogger cum brother who has published many posts like this and I got inspiration from him to publish this. I love singing, so…
અંતર માં સુગંધ પ્રસરી છે,પ્રસન્નતા ની આજે!જાણે કે પરમ આનંદ નાં,પુષ્પો ખીલ્યાં છે આજે! हिंदी में अनुवाद अंतर महक उठा है,प्रसन्नता से आज!जैसे कि परम आनंद के फूल खिले हो आज!
माँ..माँ जो मूल प्रकृति है,माँ जो जगजननी है,माँ जो शक्ति है,माँ जो सर्जन शक्ति है। माँ..जिनकी आराधना का पर्व आया है,पहले तीन दिन माँ काली की आराधना करनी है,दूसरे तीन दिन माँ लक्ष्मी की आराधना करनी है,आख़िरी तीन दिन माँ सरस्वती की आराधना करनी है। नवरात्रि की हार्दिकशुभकामनाएं। अन्य रचनाएं भी पढ़ें: त्रिदेवी की आराधना का पर्व…
शिव मेरे शिव,आप को सत् सत् वंदन।आप ही भोलेनाथ और आप ही महादेव,आप ही महाकाल और आप ही आदिदेव। रूप अनेक है मेरे शिव के,सौम्य रूप भी आपका,रौद्र रूप भी आपका,नटराज रूप भी आपका। तीन हैं नेत्र शिव के,भस्म है तन पे शिव के,वस्त्र है बाघ खाल का तन पे शिव के,सर्प है गले में…
तुने राह चुन ही ली है,तो राह पर चलने में,संदेह क्यों करता है? मन में विश्वास जगा दे,मन से डगमगाना क्यों? राह ढूंढने में मेहनत की है,तो राह पर चलने की मेहनत से,घबराहट क्यों महसूस करता है? मन में विश्वास जगा दे,मन से डगमगाना क्यों? मन को बुलंदकर,डर को हराकर,राह पर आगे क्यों नहीं बढ़ता…
चलते रहिए, चलते रहिएसारी उलझनों के साथ,चलते रहिए। करते रहिए, करते रहिएअपने कार्य (कर्तव्य) करते रहिए।चलते रहिए। उलझनें तो जीवन का हिस्सा है,उलझनों के साथ चलना,सीखते रहिए। उलझनें तो जीवन में अवसर है,हमारी प्रगति का अवसर,चलते रहिए। रुकिए मत, रुकिए मतगर उलझनों का सैलाब भी आ जाए,चलते रहिए। चलते चलते, धीरे धीरेसारी उलझन, सुलझन में बदल…
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Satya vachan… 🙂