हाइकु काव्य रचना (1)
चंचल सा है,
पर दृढ़ सा भी है,
यही मन है।
चंचल सा है,
पर दृढ़ सा भी है,
यही मन है।
चलो आज….किसी और से नहींं,खुद से बातें करे।खुद के कार्य पे नज़र डाले,खुद के विचारों पे नज़र डाले,खुद से हुई भूलों को पहचाने,खुद से ही भूलों को सुधारे। चलो आज…. किसी और का नहीं, खुद का मूल्यांकन करे। खुद को जानने से ही, जीवन में होगा सुर, वरना होगा बेसुरा। चलो आज….एक आदत बनाए।थोड़े थोड़े…
બળતી રહે લાગણીઓઅભિમાન હાવી થવાનીઆગમાંઅનેરાખ થઈ જાય સંબંધો! हिंदी में अनुवाद जलती रहेभावनाएँअहम के हावीहोने की आग में औरराख हो जाए रिश्तें!
एक परिंदा हूँ,जीवन गगन में, आज़ाद हूँ। पहले पिंजरे में केद थी,अपनी खुशियों के लिए,दूसरों पर आश्रित थी। पहले पिंजरे में केद थी,अपने जीवन के विकास के लिए,दूसरों पर आश्रित थी। अब खुद पर एतबार है,खुद के दम पर, मेहनत करके,जीवन को उमंग से जीना है। एक परिंदा हूँ,जीवन गगन में, आज़ाद हूँ।
कुछ इस कदर, आप से नज़रें मिलीकि हम शर्म से पानी-पानी हो गये,हम आप में ही खो गये। आप की नज़रों का जादूजो चला हम परकि हम सवरने लगे। दबे अरमां जगने लगे,सपने सजाने लगे,सारे दर्द मिटने लगे। कुछ इस कदर, आप से नज़रें मिलीकि हम, हम ना रहे,हम आप में ही खो गये।
चैत्र नवरात्रि का पर्व आया है,नववर्ष लेकर आया है। नववर्ष खुशियां लेकर आये,नववर्ष सुख-शांति लेकर आये,नववर्ष उत्तम स्वास्थ्य लेकर आये,यही शुभकामनाएं देना चाहुंगी। चैत्र नवरात्रि भक्ति के रंग में डुबे,नवदुर्गा की आराधना में समय बिते,आध्यात्मिक प्रगति में समय बिते,यही शुभकामनाएं देना चाहुंगी। अन्य रचनाएं भी पढ़ें: नवरात्रि त्रिदेवी की आराधना का पर्व दुर्गा माता के नव स्वरूप…
ध्यान लगाना ही है,तो परमात्मा पर लगाए। किस रिश्ते से क्या नहीं मिला,उस पर ध्यान न लगाए। परमात्मा ने हमे बहुत कुछ दिया,उस पर ध्यान लगाए। जो भी मिला है, उसके लिए कृतज्ञ रहे,खूबसूरत लम्हों पर ध्यान लगाए। जो नहीं मिला है, उस पर ध्यान लगाकर,क्यों लम्हों को बदसूरत करना? ध्यान लगाना ही है,तो परमात्मा…
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Wah Harinaji…
Kya baat hai
Thank you😊😊