#International Day of Yoga #संस्कृत मंत्र से, योग का महत्व

पतंजलि प्रार्थना योगेन चित्तस्य पदेन वाचांमलं शरीरस्य च वैद्यकेन ।योऽपाकरोत्तमं प्रवरं मुनीनां पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोऽस्मि ॥ हिंदी में अनुवाद: मन की चित्त वृत्तियों को को योग से, वाणी को व्याकरण से और शरीर की अशुद्धियों को आयुर्वेद

द्वंद्व से भरा जीवन!

जीवन की अभिव्यक्ति द्वंद्व में है। जीवन द्वंद्वात्मक है, डायलेक्टिकल है।इसलिए यहां प्रकाश है और अंधेरा है।जन्म है और मृत्यु है।अच्छा है और बुरा है।सफेद

संस्कृत सुभाषित (2)

(1)श्रोत्रं श्रुतेनैव न कुंडलेन, दानेन पार्णिन तु कंकणेन।विभाति काय: करूणापराणा, परोपकारैन तु चंदननेन।। अर्थात् कानों की शोभा कुंडलो से नहीं अपितु ज्ञान की बातें सुनने

उपनिषद वचन

“अन्नं ब्रह्म।” यह वचन उपनिषद में है, जिसका सीधा सीधा शाब्दिक अनुवाद करें तो एसा होगा कि भोजन ब्रह्म है। [अंग्रेजी में फुड इज गोड(

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