नैवेद्य मंत्र अर्थ सहित (2) (सभी देवी-देवताओं को भोग लगाने का मंत्र)

नैवेद्य मंत्र अर्थ सहित (1) (कृष्ण भगवान को भोग लगाने का मंत्र) शर्करा-खण्ड-खाद्यानि दधि-क्षीर-घृतानि च ।आहारम्‌ भक्ष्य-भोज्यम्‌ च नैवेद्यम्‌ प्रति-गृह्यताम्‌ ॥ अर्थात्: शर्करा-खण्ड ,खाध पदार्थ

जीवन का गणित

सत्व का गुणा, तमस का भागजीवन का गणित यही है। प्रेम का गुणा, नफरत का भागजीवन का गणित यही है। गुणों को जोड़ना, अवगुणों को

नैवेद्य मंत्र अर्थ सहित (1) (कृष्ण भगवान को भोग लगाने का मंत्र)

त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये।गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर।। अर्थात् हे गोविन्द, आपका ही सब दिया हुआ है, जो आपको ही समर्पित कर रहे हैं,हे

नया नूर आ गया

नया नूर आ गया,चेहरे पर छा गया।जब अपनों से,जो गिले-शिकवे थे,वो दूर कर दिये,तब नया नूर छा गया। कुछ उनकी गलती थी,कुछ मेरी गलती थी,जब

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