दुर्गा माता के नव स्वरूप (सातवां स्वरूप)

काल (समय) का नाश करने वाला स्वरूप। अंधकार रूपी अज्ञान का विनाश करने वाला स्वरूप। असुरी शक्ति का विनाश करने वाला कालरात्रि स्वरूप है। दुर्गा

दुर्गा माता के नव स्वरूप(पांचवा स्वरूप) (मातृ स्वरूप)

स्कन्ध का मतलब भगवान कार्तिकेय की माता है, इसलिए यह स्वरूप स्कन्ध माता के स्वरुप से कहा जाता है। दुर्गा माता का यह स्वरूप मातृ

दुर्गा माता के नव स्वरूप ( चौथा स्वरूप)

हम “कूष्माण्डा” शब्द की संधि विच्छेद करेंगे,“कू” का अर्थ है “कुछ”, “उष्मा” का अर्थ है “ताप” और “अंडा” का अर्थ है “ब्रह्मांड”, मतलब थोड़ी ही

दुर्गा माता के नव स्वरूप (तीसरा स्वरूप) (सुंदरता और निर्भयता का स्वरूप)

दुर्गा माता का यह स्वरूप सुंदरता का स्वरूप और निर्भयता का स्वरूप है। माता के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है, इसलिए

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