मैं तो उन पर बलिहार गई!
परमात्मा से प्रीति होना, उनमें ही खो जाना और जीवन जीना – यही सार है, इस ख़ूबसूरत कविता का।यह कविता प्रेम रस और भक्ति रस से ओतप्रोत है। मैंने जब यह रचना पढ़ी, मुझे बेहद ख़ूबसूरत लगी, जो मैं आप सबके साथ साझा करना चाहती हूँ। कविता: वेणी में तारक-फूल गूंथ,निशि ने मेरा शृंगार किया;राका-शशि…
