एक परिंदा
एक परिंदा हूँ,जीवन गगन में, आज़ाद हूँ। पहले पिंजरे में केद थी,अपनी खुशियों के लिए,दूसरों पर आश्रित थी। पहले पिंजरे में केद थी,अपने जीवन के विकास के लिए,दूसरों पर आश्रित थी। अब खुद पर एतबार है,खुद के दम पर, मेहनत करके,जीवन को उमंग से जीना है। एक परिंदा हूँ,जीवन गगन में, आज़ाद हूँ।
