एक परिंदा

एक परिंदा हूँ,जीवन गगन में, आज़ाद हूँ। पहले पिंजरे में केद थी,अपनी खुशियों के लिए,दूसरों पर आश्रित थी। पहले पिंजरे में केद थी,अपने जीवन के विकास के लिए,दूसरों पर आश्रित थी। अब खुद पर एतबार है,खुद के दम पर, मेहनत करके,जीवन को उमंग से जीना है। एक परिंदा हूँ,जीवन गगन में, आज़ाद हूँ।

दोहरी मानसिकता

अब परवाह नहीं हैकि लोग क्या कहेंगे। पहले तो मन परहावी हो जाती थीलोगों की बातें। अब मैंने मन कोमज़बूत कर लिया। जब पता चलाकि लोगों की तोदोहरी मानसिकता है। ज़मीर ही नहीं है लोगों काजैसे हवा का रुख़ बदलता हैवैसे ही लोगों के मत बदलते हैं। इसलिए अब परवाह नहीं हैकि लोग क्या कहेंगे।

उलझनें – जीवन का हिस्सा

चलते रहिए, चलते रहिएसारी उलझनों के साथ,चलते रहिए। करते रहिए, करते रहिएअपने कार्य (कर्तव्य) करते रहिए।चलते रहिए। उलझनें तो जीवन का हिस्सा है,उलझनों के साथ चलना,सीखते रहिए। उलझनें तो जीवन में अवसर है,हमारी प्रगति का अवसर,चलते रहिए। रुकिए मत, रुकिए मतगर उलझनों का सैलाब भी आ जाए,चलते रहिए। चलते चलते, धीरे धीरेसारी उलझन, सुलझन में बदल... Continue Reading →

एक दीया

आत्म-नियंत्रण का एक दीया,अपने अंतर में, जलाकर रखिए,ताकि कभी भी दुनिया के प्रलोभन,हमारे अंतर्मन में, अंधेरा न कर पाए। धैर्य का एक दीया,अपने अंतर में, जलाकर रखिए,ताकि सपनों को पाने की इच्छाएं,ज़ल्दबाज़ी में परिवर्तित न हो जाए। मन पर नियंत्रण का एक दीया,अपने अंतर में, जलाकर रखिए,ताकि दूसरों की बातों से,हमारा मन भटक न जाए।... Continue Reading →

चलो छोड़ो, जाने भी दो

चलो छोड़ो, जाने भी दोहमारे मन से, कुछ बातों को। कब तक याद करते रहेंगे,चोट पहुंची हुई यादों को? बुरा वक्त था, चला गयापतझड़ का मौसम था, चला गया। चलो छोड़ो, जाने भी दोहमारे मन से, कुछ बातों को।

तुम बदल गये हो

पहले जब हम से ख़ता हो जाती थी,चाहे कैसी भी ख़ता हो,तुम नज़रअंदाज़ कर देते थे,कभी भी हम से दूर ना हुए। पर आज जब हम से ख़ता हो जाती है,चाहे छोटी सी भी क्यों ना हो,तुम हम से दूर जाने के बहानें ढूंढने लगे हो,तुम दूरियां बढ़ाने लगे हो। पहले तो तुम्हारी नज़रों में,हम... Continue Reading →

भक्ति रस पर कुछ पंक्तियां

हे कान्हा,तेरी भक्ति में ओतप्रोत हो गई हूं। एसा मन होता हैकि मेरे नयनों से,तेरे मनमोहक रूप को निहारती रहूं। एसा मन होता हैकि मेरे कानों से,तेरी बांसुरी की धुन सुनती रहूं। एसा मन होता हैकि मेरी वाणी से,तेरी लीला के बारे में बोलती रहूं। हे मुरलीधर, बस यही प्रार्थना हैकि तेरी भक्ति करने से,... Continue Reading →

प्यारा सा एहसास

क्या ये कोई सिर्फ प्यारा एहसास है?या प्यार होने का ही ये एहसास है?पता ही न चले। क्या है नज़रों का जुकना?या मन के तरंगों का उठना?पता ही न चले। क्या है मन का चहकना?या सांसों का महकना?पता ही न चले। है ये एहसास की डोर,है जिसने बांधा, मेरा मन।है जिसने सजाया, मेरा मन। प्यारा... Continue Reading →

आदत डाल ली है

जब से तूफ़ानों मेंजीने की आदत डाल ली है,तब से तूफ़ान बेअसर है, मुझ पर।अब तो तूफ़ान और मामूली हवा का झोंकाएक समान है, मेरे लिए। जब से रिश्तेदारों से अपेक्षाएंकम रखने की आदत डाल ली है,तब से मन में निरंतर शांति पा रही हूं। जब से "मन का हो तो अच्छा"और "मन का ना... Continue Reading →

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