दृढ़ मनोबल

अगर…विश्वास की शम्मा जलाकर चलते हो,तो संशय से बुझने मत देना। अगर…रौशनी की उम्मीदें लेकर चलते हो,तो अंधेरे से डर मत जाना। अगर…कुछ कर गुज़रने की आग लेकर चलते हो,तो अवरोधों से डर मत जाना। अगर…जो चाहते हो, वो पाना चाहते हो,तो पीछे मत हट जाना। दृढ़ मनोबल से हीजीया जाता है जीवन। बुज़दिल होकर... Continue Reading →

मिलन की प्यास

प्यार के मिलन की राह में,तकती है ये आंखें। दो दिलों के मिलन की राह में,तकती है ये आंखें। मिलन हो,तो जैसे मंज़िल पाएं। मिलन हो,तो जैसे नया मंज़र पाएं। जो हम मिल जाएं,तो हम खिल जाएं। जो हम मिल जाएं,तो नया जहां बसाएं। अब बर्दाश्त नहीं दूरी,जब प्यास बढ़ी मिलन की। प्यार के मिलन... Continue Reading →

अभिव्यक्ति की कमी

मानसिक कुंठा का एक कारण ये भी है - अभिव्यक्ति की कमी। इसलिए, मैंने इस विषय पर एक कविता लिखने की कोशिश की है।अगर हमारी भावनाओं को पूर्ण अभिव्यक्ति नहीं मिलती है, तो यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। कुंठा, मानसिक तनाव और बीमारी से बचने के लिए अवश्य अपनी भावनाओं को... Continue Reading →

एसा होता है रिश्ता! (It’s all about togetherness!)

सिर्फ मैं की भावना से उपर उठेंऔर हम की भावना तरफ बढ़ें।एसा होता है रिश्ता। सिर्फ मेरी इच्छाओं से उपर उठेंऔर हमारी इच्छाओं की तरफ बढ़ें।एसा होता है रिश्ता। एक-दूसरे के साथ,ताल मिलाकर जीना,एसा होता है रिश्ता। एक-दूसरे के विचारों में,सामंजस्य बनाकर जीना,एसा होता है रिश्ता। मतभेद होना स्वाभाविक है,पर मनभेद न होने देना,एसा होता... Continue Reading →

स्वास्थ्य- पहली ज़िम्मेदारी

चलो!एक ज़िम्मेदारी,खुद के लिए उठाए। दूसरों की खुशी का,तो ख़्याल रखते हैं। चलो!अब से खुद कीखुशी का भी ख़्याल रखें। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए,व्यायाम करें। मानसिक स्वास्थ्य के लिए,ध्यान करें। भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए,सकारात्मक दृष्टिकोण रखें। सच्ची दौलत और सच्चा सुख,इसी में छिपा है। पहली ज़िम्मेदारी स्वास्थ्य है,यह कभी न भूलें।

क्यों रुकता है तू?

बहती नदियों कोकहा आता है थमना? आसमां के परिंदों कोकहा आता है रुकना? सीख ले, तू इनसेक्यों रुकता है तू? चाहे जो भी हो,मत थम, मत थम। चाहे जो भी हो,चलता जा तू।

नज़रों का जादू

कुछ इस कदर, आप से नज़रें मिलीकि हम शर्म से पानी-पानी हो गये,हम आप में ही खो गये। आप की नज़रों का जादूजो चला हम परकि हम सवरने लगे। दबे अरमां जगने लगे,सपने सजाने लगे,सारे दर्द मिटने लगे। कुछ इस कदर, आप से नज़रें मिलीकि हम, हम ना रहे,हम आप में ही खो गये।

ख़ूबसूरत रिश्ता पति-पत्नी का (1)

यह रिश्ता ही कुछ ऐसा है,जिसमें लेने से ज़्यादा,देने में मज़ा मिलता है।यह एक रिश्ता पति-पत्नी का है। जिसमें प्यार की कली खिली हो,जिसमें प्यार की महक उठी हो।बस प्यार ही प्यार बेशुमार हो,यह एक रिश्ता पति-पत्नी का है। जैसे बाती बिना दीया अधूरा,वैसे पत्नी बिना पति अधूरा!जैसे चांदनी बिना रात अधूरी,वैसे पति बिना पत्नी... Continue Reading →

हम नासमझ है

ज़िंदगी ने हमें, सब कुछ दिया,बेहतर ज़िंदगी के लिए, सब कुछ दिया। पेड़-पौधें, ज़मीन, पानी, हवाप्रकृति देकर एहसान किया। पर हम नासमझ है,प्रकृति को प्रदूषित कर दिया। लालच बढ़ाते गये,और प्रकृति को बिगाड़ते गये। प्रकृति को बिगाड़ते बिगाड़ते,जब ज़िंदगी बदतर होने लगी तब जाकर प्रकृति कीक़ीमत होने लगी। क़ीमत भी तब हुई,जब ज़िंदगी के लिएजूझ... Continue Reading →

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