प्रेम
प्रेम अगर दवा है तो मर्ज भी है। प्रेम अगर सुकून है तो बैचेनी भी है। प्रेम अगर खुशी है तो दर्द भी है। प्रेम अगर मजा है तो सजा भी है। प्रेम अगर अमृत है तो विष भी है। प्रेम हमारे जीवन में कई रूप लेकर आता है, न जाने किसको, किस रूप…
प्रेम अगर दवा है तो मर्ज भी है। प्रेम अगर सुकून है तो बैचेनी भी है। प्रेम अगर खुशी है तो दर्द भी है। प्रेम अगर मजा है तो सजा भी है। प्रेम अगर अमृत है तो विष भी है। प्रेम हमारे जीवन में कई रूप लेकर आता है, न जाने किसको, किस रूप…
मुझे तू जो मिल गया, ये जहां है बदल गया, गुनगुना उठी तन्हाईयां… मुस्कुरा उठी अंगड़ाइयां… हा….अब देख लो, मैं हूँ नयी, हा…. अब जान लो, मैं हूँ नयी। मेहक मेहक मेहकी, मेहकी हूँ फूल जैसे, मेहकी मेरी आरज़ू, मेहकी मेरी ज़ुस्तज़ू , मेहकी है ये खुशीयां, मेहकी है वादीयां, मेहकी है ये ज़िंदगी, मिली…
કુટુંબનો પાયો જ પરસ્પર પ્રેમ, વિશ્વાસ અને માન-સન્માન છે, એમાં દરેક વ્યક્તિ સમજણ, ધીરજ, ક્ષમા, જતુ કરવાની ભાવના જેવા ગુણો કેળવે તો જ જીવનમાં રંગ હોય છે. કુટુંબ એક માણસથી નથી બનતુ પણ માણસોના સમુહથી બને છે. એકમેકના વિચારોથી, પ્રતિભાથી કુટુંબની આર્થિક પ્રગતિ થતી હોય છે, ઘણાં બધા ફળ મળે છે, જેમાં જીવન જીવવાની કળા…